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मूलभूत अधिकार से वंचित ग्रामीण

राजस्थान के बारां जिले में गहराता जल संकट

“हर घर नल से जल” योजना बनी दिखावा

बारां, राजस्थान। शाहाबाद तहसील का ढिकवानी गाँव इन दिनों एक गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से बनी पानी की टंकी शोपीस बनकर रह गई है और ‘हर घर नल से जल’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएँ प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं। ग्रामीण, जिनमें महिलाएँ सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, आज भी दूर-दराज से पीने का पानी लाने को मजबूर हैं, जबकि सरकार और अधिकारियों की ओर से केवल खोखले आश्वासन और निष्क्रियता ही मिल रही है।

करोड़ों की योजना, परिणाम शून्य

ग्राम ढिकवानी में निर्मित पानी की टंकी का उद्घाटन 21 अप्रैल 2022 को किया गया था। शुरुआत में कुछ दिनों के लिए पानी की आपूर्ति हुई, लेकिन फिर टंकी बंद हो गई। गाँव के निवासी आशीष मेहता बताते हैं कि ग्रामीणों को कभी भी नियमित रूप से पानी नहीं मिला। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 12 फरवरी 2024 को बिजली कनेक्शन काट दिया गया और जल स्वच्छता समिति पर ₹1,85,000 का भारी-भरकम बिजली बिल थोप दिया गया, जबकि ग्रामीणों को कभी भी योजना का लाभ नहीं मिला।

यह केवल पैसे की बर्बादी का मामला नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे सरकारी परियोजनाओं को भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण जनता तक पहुँचने से रोका जा रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही और ‘सूचना का अधिकार’ का मखौल
ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर हर संभव दरवाजा खटखटाया है। जिला कलेक्टर, एसडीओ, तहसीलदार, PHED विभाग और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक को विस्तृत शिकायतें भेजी गई हैं, लेकिन किसी भी स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय विधायक के निर्देशों के बावजूद ठेकेदार और विभागीय अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं।

आशीष मेहता ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) 2005 के तहत जानकारी माँगी, लेकिन 35 दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। यह सूचना के अधिकार का सीधा उल्लंघन है, जो अधिकारियों की मनमानी और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है।

सड़कों पर जनता, अधिकारी मौन

यह समस्या सिर्फ ढिकवानी तक सीमित नहीं है। शाहाबाद तहसील के कई अन्य गाँवों में भी ऐसी ही स्थिति है। ग्रामीण पिछले 3-4 महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज को अनसुना किया जा रहा है। भीषण गर्मी में, जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, महिलाएँ मीलों चलकर पानी लाने को मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल ग्रामीणों के जीवन को कठिन बना रही है, बल्कि उनके संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार) का भी सीधा उल्लंघन है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:

1. ढिकवानी पानी की टंकी और अन्य क्षेत्रीय योजनाओं की उच्च स्तरीय जाँच हो।
2. दोषी विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार पर कठोर कार्रवाई की जाए।
3. ‘हर घर नल से जल योजना’ को तुरंत लागू कर ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराया जाए।
4. RTI और शिकायतों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए।
5. जल स्वच्छता समिति पर थोपे गए ₹1,85,000 के बिजली बिल की निष्पक्ष जाँच हो।

यह मामला केवल स्थानीय प्रशासनिक विफलता का नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुँच पा रहा है। यह जरूरी है कि सरकार इस मामले का संज्ञान ले और ग्रामीणों की समस्या का समाधान करे, ताकि ढिकवानी और आस-पास के गाँवों को पीने के पानी के लिए इस तरह संघर्ष न करना पड़े।

‘हर घर नल से जल’

‘हर घर नल से जल’ योजना भारत सरकार द्वारा चलाई गई एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसे जल जीवन मिशन (JJM) के तहत शुरू किया गया था। इस योजना का मुख्य लक्ष्य 2024 तक भारत के हर ग्रामीण घर में नल से स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।

मुख्य उद्देश्य और विशेषताएँ

1. हर घर तक नल का कनेक्शन: योजना का प्राथमिक उद्देश्य देश के सभी ग्रामीण घरों तक पाइपलाइन से पानी पहुँचाना है।
2. पर्याप्त और नियमित जल आपूर्ति: यह सुनिश्चित करना कि हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 55 लीटर पानी मिले।
3. स्वच्छ और सुरक्षित पानी: आपूर्ति किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता उच्च स्तर की हो ताकि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ न हों।
4. सामुदायिक भागीदारी: पानी समितियों (ग्राम जल तथा स्वच्छता समिति) के माध्यम से योजना के प्रबंधन और रखरखाव में स्थानीय समुदायों को शामिल करना।
5. जल संरक्षण को बढ़ावा: वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting) और पानी के कुशल उपयोग जैसे तरीकों को प्रोत्साहित करना।

कुल मिलाकर इस योजना का उद्देश्य सिर्फ पानी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और महिलाओं तथा बच्चों को पानी लाने के बोझ से मुक्त करना भी है।

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