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बिजनौर में गुरुवार की रात गूंजी शेरों-शायरी की सदा, श्रोताओं ने दी जमकर दाद

नुमाइश मुशायरे की ऐतिहासिक सफलता से आयोजन मंडल गदगद

जो डाल लेते हैं घुटने मोड़कर सोने की आदत… उन्हें फिर जिंदगी में कम नहीं पड़ती कोई चादर

बिजनौर। जिला कृषि, औद्योगिक एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनी के तहत बृहस्पतिवार की रात इंदिरा बाल भवन में एक भव्य अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसने ऐतिहासिक सफलता हासिल की। देश-विदेश के जाने-माने शायरों और शायराओं की शिरकत ने इस महफ़िल को यादगार बना दिया। आयोजन समिति की कोशिशों से पहली बार सभी शायर और शायरात समय पर यानी ठीक 8 बजे मंच पर मौजूद थे, हालांकि श्रोताओं और अतिथियों के विलंब से पहुंचने के कारण मुशायरा 9:30 बजे के बाद ही शुरू हो सका।

प्रमुख अतिथियों ने किया कार्यक्रम का शुभारंभ

मुशायरे का उद्घाटन जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी साकेंद्र प्रताप सिंह ने दीप प्रज्वलित कर और फीता काटकर किया। इस मौके पर सांध्य दैनिक ‘चिंगारी’ के मुख्य संपादक डॉ. सूर्यमणि रघुवंशी, नगर पंचायत झालू के अध्यक्ष लोकेंद्र चौधरी, चेयरपर्सन इंदिरा सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. बीरबल सिंह, कार्यक्रम संयोजक मरगूब रहमानी और सतवीर त्यागी, अधिशासी अधिकारी विकास कुमार, जुबैर अहमद, मोहम्मद वसीम, प्रभाकर कुमार गौतम सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। आयोजन समिति के सदस्यों ने सभी अतिथियों का बुके, बैज और माला पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया।

शायरों ने बांधा समां, श्रोता बोल उठे वाह भाई वाह

कार्यक्रम की शुरुआत में आरजेपी इंटर कॉलेज के प्रवक्ता गय्यूर आसिफ ने अपनी अदबी गुफ्तगू से श्रोताओं को जोड़े रखा। इसके बाद विश्व विख्यात नाजिम ए मुशायरा नदीम फर्रुख को संचालन के लिए आमंत्रित किया गया। नदीम फर्रुख ने अपनी शानदार आवाज़ और खूबसूरत लहजे से मुशायरे का माहौल बनाया। बुरहानपुर के वरिष्ठ शायर डॉ. जलीलुर्रहमान ने नाते पाक पढ़कर मुशायरे का आगाज़ किया।

रात 4 बजे तक चले इस मुशायरे में शायरों ने अपनी ग़ज़लों, गीतों और नज़्मों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरी रात इंदिरा बाल भवन तालियों की गड़गड़ाहट और ‘वाह वाह’ की सदाओं से गूंजता रहा। अफ़ज़ल इलाहाबादी, शबीना अदीब, अल्तमश अब्बास, डॉ. नदीम शाद, डॉ. जलीलुर्रहमान, अल्ताफ जिया, हाशिम फिरोजाबादी, पॉपुलर मेरठी, हिमांशी बाबरा, नईम अख्तर और डॉ. नवाज देवबंदी की शायरी को दर्शकों ने खूब सराहा।

शायरों के लोकप्रिय शेर और पंक्तियां

  • डॉ. नवाज़ देवबंदी को उनके इस शेर पर खूब दाद मिली:

जो घुटने मोड़कर सोने की आदत डाल लेते हैं,
उन्हें फिर जिंदगी में कोई चादर कम नहीं पड़ती।

  • राहुल शर्मा ने कहा:
    अगर लिखोगे वसीयत अपनी तो जान पाओगे ये हकीकत,
    तुम्हारी अपनी ही मिल्कियत में तुम्हारा हिस्सा कहीं नहीं है।
  • युवा शायर अल्ताफ जिया ने पढ़ा:
    झूठ को मसनद-ए-शाही पे बिठाया गया है,
    और सच्चाई हवालात में रक्खी गई है।
  • युवा शायरा हिमांशी बाबरा की पंक्तियों को खूब पसंद किया गया:
    बात रुखसार की होती तो कोई बात न थी,
    आज तो रूह पे मारा है तमाचा तूने।
  • अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायरा शबीना अदीब के इस शेर पर जोरदार तालियां बजीं:
    वतन बचाने का वक्त है, ये मकान बचाने की फिक्र छोड़ो,
    मेरे भी हाथों में दे दो परचम मेरे बुजुर्गों, हिना से पहले।
  • हास्य-व्यंग्य के शायर पॉपुलर मेरठी ने अपने मुक्तक से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया:
    खुद तीस का है और दुल्हन साठ बरस की,
    गिरती हुई दीवार के साए में खड़ा है।

आयोजन में इनका रहा विशेष योगदान

मुशायरे को सफल बनाने में मैराज बिजनौरी, कारी इम्तियाज़ अज़हर, अथर सऊद, अरबाब रहमानी, पत्रकार शकील अहमद और शेख आदिल का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के पहले हिस्से की अध्यक्षता वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. बीरबल सिंह ने की, जबकि दूसरे हिस्से में वरिष्ठ शायर डॉ. नवाज़ देवबंदी की सदारत में प्रोग्राम आगे बढ़ा।

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