newsdaily24

update रहें…हर दम, हर पल

आयुर्वेदिक चिकित्सालय की स्थिति बदहाल

सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए सवाल

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई है शिकायत

अल्मोड़ा DM को नहीं जनता की वास्तविक जरूरतों की चिंता !

देहरादून। अल्मोड़ा के सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस मामले में उच्च अधिकारियों को शिकायत पत्र भेजकर आवश्यक दवाओं की कमी, बंद पड़ी पंचकर्म सेवा, और प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया गया है।

मुख्य समस्याएँ और अधिकारियों की उदासीनता

संजय पाण्डे ने अपनी शिकायत में बताया कि शहर के बीचों-बीच होने के बावजूद, यह आयुर्वेदिक चिकित्सालय मरीजों को मूलभूत सुविधाएँ देने में असमर्थ है!

दवाओं का अभाव और बंद पड़ी सेवाएँ

1. दवाओं की कमी: अस्पताल में दवाओं का लगातार अभाव है, जिसके कारण मरीजों को पर्ची तो मिलती है, लेकिन दवाइयाँ उपलब्ध नहीं होतीं। उन्हें मजबूर होकर महँगी दवाएँ बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।
2. पंचकर्म सेवा बंद: पंचकर्म जैसी महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवा लंबे समय से बंद है, जबकि कागजों में इसका संचालन दिखाया जा रहा है।

अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया

संजय पाण्डे के अनुसार, जब उन्होंने इस मुद्दे पर जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. मोहम्मद शाहिद से मुलाकात की, तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। अधिकारी का यह कहना कि “अस्पताल में अतिरिक्त कमरा नहीं है,” इस बात का सबूत है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं।

इसके अलावा, संजय पाण्डे ने जिलाधिकारी अल्मोड़ा पर भी आरोप लगाया कि वे शहरवासियों की वास्तविक जरूरतों की अनदेखी कर रहे हैं और केवल कागजी योजनाओं पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को जन स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ बताया और कहा कि यह सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं को विफल करने जैसा है।

संजय पाण्डे की प्रमुख माँगें और चेतावनी

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, संजय पाण्डे ने उच्च अधिकारियों से कुछ महत्वपूर्ण माँगें की हैं:
1. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में आवश्यक दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
2. पंचकर्म और अन्य आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाएँ तुरंत शुरू की जाएँ।
3. चिकित्सालय के लिए एक उपयुक्त भवन की पहचान कर स्थायी समाधान किया जाए।
4. इस लापरवाही के लिए संबंधित अधिकारियों और जिलाधिकारी की भूमिका की उच्चस्तरीय जाँच करके उन पर कठोर कार्रवाई की जाए।

संजय पाण्डे ने चेतावनी दी है कि यदि इन माँगों पर जल्द कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो वे सूचना का अधिकार (RTI) का उपयोग करेंगे और जरूरत पड़ने पर माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करेंगे। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई है।

Posted in , , , ,

Leave a comment