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यूपी के पंचायती राज विभाग में हैं कार्यरत

स्वाति गुप्ता की कहानी और वायरल फेसबुक लाइव का पूरा सच

PCS अधिकारी स्वाति गुप्ता की शर्तें मूर्खतापूर्ण या दबंगई ?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की PCS अधिकारी स्वाति गुप्ता हाल ही में अपने एक वायरल फेसबुक लाइव वीडियो के कारण चर्चा में हैं। इस वीडियो में उन्होंने अपने फॉलोअर्स से मिलने के लिए कुछ अनूठी शर्तें रखी हैं, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूब चर्चा हो रही है। आइए जानते हैं कि कौन हैं स्वाति गुप्ता और क्या है इस पूरे मामले की कहानी?

कौन हैं स्वाति गुप्ता?

स्वाति गुप्ता 2017 बैच की एक PCS अधिकारी हैं, जो वर्तमान में यूपी के पंचायती राज विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने पहले ही प्रयास में यूपी पीसीएस परीक्षा पास कर ली थी। स्वाति सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 254K से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और उनकी रील्स पर अक्सर लाखों में व्यूज आते हैं, जिसमें एक रील पर तो 23 मिलियन से ज्यादा व्यूज भी आए थे।

मिलूंगी तब, जब बनोगे ‘टॉप फैन’

हाल ही में स्वाति गुप्ता ने एक फेसबुक लाइव किया, जिसमें उन्होंने अपने फॉलोअर्स से मिलने के लिए दो खास शर्तें रखीं। उन्होंने कहा कि जो भी उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहता है, उसे पहले फेसबुक पर उनका ‘टॉप फैन’ बनना होगा और लगातार 30 दिनों तक उनकी पोस्ट को शेयर करना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग इन शर्तों को पूरा करेंगे, उन्हें वह खुद मिलने के लिए आमंत्रित करेंगी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि उनसे मिलने आने वाले व्यक्ति की पोस्ट को वह अपने खुद के फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा करेंगी।

इस लाइव के पीछे की कहानी

स्वाति गुप्ता द्वारा रखी गई इन शर्तों के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं और यह मामला तेजी से वायरल हो गया। कुछ लोगों ने उनकी शर्तों को अजीब बताया, तो कुछ ने इसे सोशल मीडिया पर अपनी पहुंच बढ़ाने का एक तरीका माना। यह पूरा मामला स्वाति गुप्ता की सोशल मीडिया पर सक्रियता और उनके फॉलोअर्स की संख्या से जुड़ा है, जहां उन्होंने अपने फैंस के साथ जुड़ने का एक नया और अनूठा तरीका निकाला।

उनके वीडियो में रखी गई शर्तें!

10वीं और 12वीं की मार्कशीट: स्वाति गुप्ता ने कहा है कि जो भी उनसे मिलने आएगा, उसे अपनी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट दिखानी होगी।
आधार कार्ड: मार्कशीट के साथ-साथ पहचान के लिए आधार कार्ड भी लाना जरूरी है।
जन्म तिथि का सत्यापन: जन्म तिथि के सत्यापन के लिए जन्म प्रमाण पत्र या कोई अन्य सरकारी दस्तावेज़ भी दिखाना होगा।
साफ-सुथरे कपड़े: उन्होंने कहा कि उनसे मिलने आने वाले लोगों को साफ और सभ्य कपड़े पहनकर आना चाहिए।
मोबाइल फोन पर प्रतिबंध: स्वाति गुप्ता ने यह भी कहा कि उनके पास मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

स्वाति गुप्ता का करियर और शिक्षा

स्वाति गुप्ता ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) मेरठ से की। 12वीं में साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने विद्या कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। इसके बाद, उन्होंने इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल वीमेन यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर और इंफॉर्मेशन सिस्टम सिक्योरिटी में एमटेक की डिग्री हासिल की।

कई परीक्षाओं में मिली सफलता

स्वाति गुप्ता ने अपने करियर में कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। उन्होंने एक बार यूपीएससी की मेन्स परीक्षा पास की थी, हालांकि इंटरव्यू में उनका चयन नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने दो बार यूपी पीसीएस परीक्षा पास की, पहली बार 2017 में और दूसरी बार 2018 में। इन परीक्षाओं के अलावा, उन्होंने PGT कंप्यूटर साइंस, IB असिस्टेंट सेंट्रल इंटेलिजेंस ऑफिसर, राजस्थान प्रशासनिक सेवा, मंडी इंस्पेक्टर और PCS फॉरेस्ट ऑफिसर जैसी परीक्षाएं भी पास की हैं।

शर्तें मूर्खतापूर्ण हैं या दबंगई ?

इस पर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है। पीसीएस अधिकारी स्वाति गुप्ता की शर्तों को लेकर कई तरह के विचार सामने आए हैं। कुछ लोग इसे मूर्खतापूर्ण मानते हैं, जबकि कुछ इसे दबंगई या एक तरह की रणनीति मान सकते हैं।
आइए, इन दोनों पहलुओं पर विचार करते हैं:

मूर्खतापूर्ण होने का तर्क

1. सार्वजनिक पद का दुरुपयोग: एक सरकारी अधिकारी का काम जनता के लिए सुलभ होना होता है। ऐसी शर्तें लगाना, जहां लोग सिर्फ सोशल मीडिया पर फॉलो या शेयर करके ही मिल सकते हैं, उनके पद की गरिमा के खिलाफ माना जा सकता है। यह एक अधिकारी के रूप में उनकी जिम्मेदारियों से मेल नहीं खाता।
2. फैन फॉलोइंग बढ़ाना: यह शर्त एक अधिकारी के बजाय एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की तरह लग रही है। कुछ लोग इसे अपनी लोकप्रियता और ‘फैन फॉलोइंग’ बढ़ाने का एक तरीका मान सकते हैं, जो कि एक सिविल सेवक के लिए उपयुक्त नहीं है।

दबंगई या रणनीति होने का तर्क

1. अधिकार का प्रदर्शन: कुछ लोग इसे एक तरह की दबंगई मान सकते हैं, जहां एक अधिकारी अपनी पद और सोशल मीडिया की ताकत का इस्तेमाल करके लोगों पर अपनी शर्तें थोप रहा है। यह एक संकेत हो सकता है कि वह अपनी स्थिति का लाभ उठा रही हैं।
2. अनोखी रणनीति: इसे एक अनोखी रणनीति के रूप में भी देखा जा सकता है, जिसके जरिए उन्होंने अपनी बात को वायरल किया और रातों-रात चर्चा में आ गईं। यह उनके फॉलोअर्स और जनता के साथ जुड़ने का एक गैर-पारंपरिक तरीका हो सकता है, भले ही यह विवादित हो।

कुल मिलाकर निष्कर्ष

यह कहना मुश्किल है कि उनकी शर्तें पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण हैं या दबंगई! यह दोनों का मिलाजुला रूप हो सकता है। यह एक ऐसा कदम है जिसने उन्हें सुर्खियों में तो ला दिया है, लेकिन साथ ही उनके पद और जिम्मेदारियों पर भी सवाल उठाए हैं? एक लोक सेवक से जनता के प्रति अधिक विनम्र और सुलभ होने की उम्मीद की जाती है, और उनकी ये शर्तें इस उम्मीद के विपरीत हैं!

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