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यूपी शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला: वसूली के आदेश जारी

7 शिक्षकों पर नियम विरुद्ध वेतन लेने के आरोप

7 साल से चल रहा फर्जीवाड़ा अब पकड़ में आया

गुरुजी व मैडम हड़प गए सरकार के ₹70 लाख

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। फर्जी नियुक्ति और पदोन्नति के बाद अब अनियमित वेतन भुगतान का मामला सामने आया है। जिला रामपुर के सात शिक्षकों को नियम विरुद्ध वेतन लेने के आरोप में 70 लाख रुपए से अधिक की वसूली का आदेश दिया गया है।

वेतन वृद्धि का फर्जीवाड़ा

दरअसल, यह मामला 9 जून 2014 को शासन द्वारा जारी एक आदेश से जुड़ा है। इस आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की पदोन्नति 1 जनवरी 2006 से 1 दिसंबर 2008 के बीच हुई थी, उन्हें पदोन्नति की तारीख से 17,140 रुपए का वेतनमान मिलना था। हालांकि, जनपद के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी श्याम किशोर तिवारी ने इस तारीख के बाद पदोन्नति पाने वाले शिक्षकों के विकल्प रद्द कर दिए थे।
इसके बावजूद, मई 2018 में कुछ शिक्षकों ने कथित तौर पर लेखा कार्यालय से मिलीभगत कर अपने वेतन में यह लाभ अंकित करा लिया।

ऑडिट में हुआ खुलासा

जब इस मामले की शिकायत शासन से की गई, तो जुलाई 2021 में एक ऑडिट टीम भेजी गई। ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया कि सात शिक्षकों को नियमों के विरुद्ध अधिक भुगतान किया गया था। इस रिपोर्ट को वित्त नियंत्रक बेसिक द्वारा महानिदेशक को भेजा गया।
जुलाई 2025 में हुई समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव ने इस मामले पर गंभीरता से चर्चा की। उन्होंने रामपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी और वित्त एवं लेखा अधिकारी को विशेष हिदायत दी और उन्हें 8 अगस्त को फिर से तलब किया। बैठक में शिक्षकों को हुए अधिक भुगतान और उनके सही मूल वेतन की जानकारी दी गई। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आगे की कार्रवाई के लिए अधिकृत किया गया।

रिकवरी और विभागीय कार्रवाई

रामपुर की बीएसए कल्पना देवी ने बताया कि संबंधित शिक्षकों का वेतन संशोधित कर दिया गया है। उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया गया है और साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। मामले की जांच अभी भी जारी है।

वसूली की राशि:

  • एक शिक्षक: 10 लाख 22 हजार 349 रुपए
  • पांच शिक्षिकाएं: प्रत्येक से 10 लाख 2 हजार 993 रुपए
  • एक अन्य शिक्षिका: 9 लाख 71 हजार 895 रुपए
    कुल मिलाकर, इन सात शिक्षकों से लगभग 70 लाख रुपए की रिकवरी की जाएगी।

यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करता है।

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