अलग-अलग स्थानों पर अपना डेरा डाले हैं लगभग 500 से ज़्यादा गुलदार
बिजनौर में गुलदार का भयंकर आतंक
भय के साए में जी रहे आक्रोशित ग्रामीण
अब तक 36… शिकार बना चुका 26 महीने में गुलदार
~ भूपेंद्र निरंकारी
बिजनौर। जिले में गुलदार (तेंदुए) का आतंक लगातार जारी है, जिससे ग्रामीण भय और आक्रोश में हैं। पिछले लगभग 26 महीनों में गुलदार के हमलों में कुल 36 लोगों की मौत हो चुकी है और 55 अन्य लोग घायल हुए हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, 26 महीनों में 33 मौतें हुई थीं, लेकिन हाल ही में हुए हमलों के बाद यह आंकड़ा 36 तक पहुंच गया है, जिससे स्थिति की गंभीरता स्पष्ट होती है।

जागरूकता अभियान के बीच आरोप
समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए गए, जिसमें ग्रामीणों को खेत या जंगल में जाते समय 6 से 7 लोगों के समूह में लाठी डंडा साथ रखने की सलाह दी गई। हालांकि, इतने प्रयासों के बावजूद भी हमले जारी हैं। गुलदार के हमले को लेकर कई प्रदर्शन भी हुए हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग द्वारा ज़रूरी कदम नहीं उठाए गए हैं। घटनाओं के बढ़ने के बाद, अब वन विभाग के आला अधिकारी मीडिया के कैमरे से बचते नजर आ रहे हैं और कैमरे के सामने कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं।
हालिया 14 दिन में चार शिकार: बच्चों पर लगातार हमले
गुलदार के हमलों में आई तेजी ने ग्रामीणों को और भी दहला दिया है। पिछले 14 दिनों के भीतर, हिंसक गुलदारों ने तीन मासूम बच्चों सहित एक महिला की जान ले ली।
6 सितंबर: नगीना देहात थाना क्षेत्र के ग्राम कंडरावाली में 10 वर्षीय गुड़िया को दूध लेने जाते समय उठाकर मार डाला।
9 सितंबर: नजीबाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम मथुरापुर मोर निवासी 8 वर्षीय हर्षित पर हमला किया, जिसकी बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मौत हो गई।
14 सितंबर: थाना नजीबाबाद क्षेत्र के गांव इसेपुर की महिला मीरा को गुलदार ने अपना निवाला बनाया।
इन लगातार हो रही घटनाओं के बाद, हाल ही में नजीबाबाद क्षेत्र में एक गुलदार को पिंजरे में कैद किया गया था।

गुलदार के आतंक के मुख्य कारण
1. गन्ने के खेत बने सुरक्षित ठिकाना
जिले के चांदपुर, नजीबाबाद, नहटौर, और कोतवाली देहात क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। गन्ने के खेत गुलदारों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना (कवर) बन गए हैं। वे इन खेतों में छुपकर इंसानों और मवेशियों का शिकार करते हैं, जिससे मानव-गुलदार संघर्ष तेज़ी से बढ़ा है।
2. बिजनौर में गुलदारों की बढ़ती संख्या
वन विभाग के अनुसार, बिजनौर जिले में लगभग 500 से ज़्यादा गुलदार अलग-अलग स्थानों पर अपना डेरा बना चुके हैं। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं है। यह अनुमान वन विभाग और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, जो जिले में गुलदारों की बढ़ी हुई संख्या और उनके द्वारा किए जा रहे हमलों का जिक्र करते हैं, जिसके कारण ग्रामीण खेतों में जाने से कतरा रहे हैं।

पकड़े भी 100 से ज्यादा गुलदार
वहीं, लगातार हमलों के बावजूद, वन विभाग ने लगभग तीन साल में 100 से ज़्यादा गुलदारों को पिंजरे में कैद किया है, लेकिन यह संख्या गुलदारों की बढ़ती हुई आबादी के मुकाबले काफी कम है। ग्रामीणों को डर है कि अगर जल्द ही कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया तो गुलदारों की संख्या हजारों में हो सकती है।

ग्रामीणों का जीवन और वन विभाग के प्रयास
~ गुलदार के खौफ से ग्रामीण क्षेत्रों में शाम होते ही लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं।
~ लोग अकेले बाहर निकलने से डरते हैं, खासकर गन्ने के खेतों के पास। इस आतंक के साये में ग्रामीण तीन साल से जी रहे हैं।
~ वन विभाग लगातार गुलदार को पकड़ने का प्रयास कर रहा है।
~ जिले भर में 40 से अधिक स्थानों पर पिंजरे और ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं।
~ ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए मुखौटे बांटे गए हैं।
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