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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की आर्थिक अपराध अनुसंधान विंग (EOW) ने रामेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के बहुचर्चित ठगी मामले में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में एक और आरोपी रवीन्द्र पाल सिंह को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया है। रवीन्द्र पाल सिंह कंपनी की शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद शाखा में एजेंट के तौर पर काम करता था। मुकदमा 11 साल पहले दर्ज किया गया था।

यह गिरफ्तारी 6 से 11 अक्टूबर तक चल रहे ईओडब्ल्यू के विशेष अभियान का हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य निवेशकों के साथ हुई वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में वांछित आरोपियों को पकड़ना है। ईओडब्ल्यू की टीम ने वांछित आरोपी रवीन्द्र पाल सिंह को बुधवार को लखनऊ के राममनोहर लोहिया पार्क के पास ताज होटल से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी रवीन्द्र पाल सिंह ने अपना अपराध कबूल कर लिया है।

गिरफ्तार आरोपी रवीन्द्र पाल सिंह रामेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड का एजेंट था, जिसने निवेशकों को ऊंचे ब्याज और आकर्षक रिटर्न का लालच देकर उनकी गाढ़ी कमाई को आरडी, एफडी और अन्य निवेश योजनाओं में जमा करवाया। जांच में यह साबित हुआ है कि वह कंपनी के निदेशकों के साथ मिलकर निवेशकों की पूंजी हड़पने के षड्यंत्र में सीधे तौर पर शामिल था।

रामेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशकों और एजेंटों ने मिलकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की। जांच के दौरान यह सामने आया है कि केवल शाहजहांपुर जिले में ही कंपनी पर निवेशकों के करीब 30 करोड़ रुपये की देनदारी बकाया है। कंपनी ने शुरू में आकर्षक स्कीम्स का जाल बिछाया, लेकिन बाद में निवेशकों का पैसा लेकर फरार हो गए।

मुकदमा दर्ज: इस मामले की शुरुआत 28 जनवरी 2014 को शाहजहांपुर के सदर बाजार थाने में हुई थी। कंपनी के खिलाफ धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), 447 (अनधिकृत प्रवेश), 468 (जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

EOW को हस्तांतरण:

प्रारंभिक जांच के बाद 5 मई 2014 को उत्तर प्रदेश शासन ने मामले को आर्थिक अपराध अनुसंधान विंग (EOW) को सौंप दिया।

आरोप पत्र: ईओडब्ल्यू की गहन जांच में कुल 57 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है, जिनमें से 50 के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं।

वर्तमान स्थिति: यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया है कि इस मामले में बाकी सात वांछित आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। एजेंसी ने आम जनता को संदिग्ध निवेश योजनाओं से सावधान रहने और निवेश से पहले पूरी जांच करने की सलाह दी है। रवीन्द्र पाल सिंह की गिरफ्तारी से निवेशकों को कुछ राहत मिली है, जो न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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