IGRS शिकायत का फ़र्ज़ी निस्तारण
मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल के मानकों की उड़ाई गईं धज्जियाँ
लखनऊ विकास प्राधिकरण में बड़ा घोटाला: मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों का दुरुपयोग!
~ अनिल कुमार सिंह
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के अनुरक्षण अनुभाग में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है! अनुरक्षण अनुभाग के अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्राधिकरण मुख्यालय के पुराने व नवीन भवनों में मज़बूत फर्नीचर और सौंदर्यकृत कार्यालय कक्षों को तोड़कर नवीन कक्षों के निर्माण के नाम पर विकास योजनाओं के धन का अपव्यय किया है! यह आरोप लगाया गया है कि नवीन कक्षों के निर्माण की आड़ में बड़े पैमाने पर सरकारी धन की लूट की मंशा है, जबकि पूर्व में बनाए गए कार्यालय कक्ष पूरी तरह से मज़बूत और उपयोग योग्य थे!
🔴 फ़र्ज़ी निस्तारण से प्रशासनिक चूक उजागर
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब मेंटेनेंस व नवीनीकरण से संबंधित नियम विरुद्ध पास किए गए टेंडर की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर की गई।
अधिकारियों पर आरोप: प्राधिकरण के अवर अभियंता आशीष श्रीवास्तव, मनोज सागर सहायक अभियंता तथा अधिशासी अभियंता-अनु०शि० द्वारा शिकायतकर्ता से बिना कोई वार्ता किए ही शिकायत का फ़र्ज़ी निस्तारण कर दिया गया।
मानकों का उल्लंघन: निस्तारित शिकायत आख्या के प्रपत्र में यह उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता से वार्ता की गई है और वह आख्या से संतुष्ट है, जबकि यह दावा बिल्कुल ग़लत और फ़र्ज़ी बताया गया है। इस कार्रवाई ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल के मानकों की अवहेलना की है।

⚖️ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग
फ़र्ज़ी आख्या देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अब विधिक एवं वैधानिक कार्यवाही की मांग की जा रही है।
निलंबन की मांग: भ्रष्टाचार का द्वैतक इन अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई करने और उन्हें तत्काल निलंबित करने की मांग की गई है।
उच्च-स्तरीय जाँच: यह भी मांग की गई है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, शासन स्तर पर किसी न्याय प्रिय अधिकारी से मामले की जाँच कराकर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
कार्य पर रोक: प्राधिकरण मुख्यालय में चल रहे इस अनावश्यक और नियम विरुद्ध निर्माण कार्य पर शीघ्र रोक लगाने की आवश्यक त्वरित कार्यवाही की मांग की गई है, ताकि सरकारी धन की योजना बनाकर की जा रही लूट पर अंकुश लग सके।
❓ उपाध्यक्ष पर टिकीं निगाहें
अब सबकी निगाहें LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार पर टिकी हुई हैं। प्राधिकरण में सवाल उठ रहे हैं कि उपाध्यक्ष इस फ़र्ज़ी निस्तारण और शासनादेशों के मानकों की अवहेलना पर क्या कार्यवाही करते हैं। यदि उपाध्यक्ष इन भ्रष्टाचारी अधिकारियों को संरक्षण देकर चुप्पी साध लेते हैं, तो यह करोड़ों रुपये के मेंटेनेंस व नवीनीकरण के नाम पर हो रहे बंदर बाँट को अपनी सहमति देने और भ्रष्टाचार को प्रोत्साहित करने के समान माना जाएगा!
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