अधूरे पुल के कारण हर साल ‘खो नदी’ बरपाती है कहर
कीचड़ और बीमारियों के बीच जीने को मजबूर ग्रामीण
पोर्टल पर शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन
विकास से कोसों दूर नरूलापुर: बदहाल रास्ते और अधूरे पुल ने छीना ग्रामीणों का चैन, अब पलायन की तैयारी
बिजनौर, (भूपेंद्र निरंकारी)। नगीना देहात का गांव नरूलापुर आज के आधुनिक युग में भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। रायपुर सादात से चंदन वाला होते हुए नरूलापुर को गड़ी गामड़ी से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग इस कदर बदहाल है कि यहाँ इंसानों का चलना तो दूर, एंबुलेंस तक नहीं पहुँच पाती। बदहाल सड़कों, अधूरे पुल और जलभराव की समस्या से त्रस्त ग्रामीण अब गांव से पलायन करने का मन बना चुके हैं।

खूनी सड़क और अधूरा पुल: जान पर भारी लापरवाही
ग्रामीणों का आरोप है कि नरूलापुर से गड़ी गामड़ी के बीच खो नदी पर बने पुल का निर्माण कार्य बीच में ही छोड़ दिया गया है। पुल अधूरा होने के कारण बरसात में नदी का पानी सीधे गांव में घुस जाता है, जिससे हर साल करोड़ों की संपत्ति का नुकसान होता है। खराब रास्तों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
कीचड़ के साम्राज्य से बीमारियों का खतरा
गांव के भीतर की स्थिति नारकीय बनी हुई है। अंबेडकर मंदिर के सामने वाला नाला गंदगी और कीचड़ से लबालब है। जल निकासी की व्यवस्था न होने से रास्तों पर पानी भरा रहता है, जिससे पीने का पानी भी दूषित हो गया है। गांव में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है।

ग्रामीणों की जुबानी: बदहाली की कहानी
* सड़कों का हो तत्काल निर्माण: “गांव के अंदर की सड़कें चलने लायक नहीं बची हैं। बच्चों को स्कूल जाने में भारी परेशानी होती है। सरकार को तत्काल सड़कों का निर्माण कराना चाहिए।” — दीपक पाल
* नाले का निर्माण है जरूरी: “अंबेडकर मंदिर के सामने नाला कीचड़ से भरा रहता है। यहाँ नए नाले का निर्माण होना अनिवार्य है ताकि गंदगी से निजात मिल सके।” — टीकम सिंह
* स्वास्थ्य सेवाओं से कटे ग्रामीण: “इमरजेंसी के समय गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुँच पाती। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि कम से कम मरीज को अस्पताल तक समय पर ले जाया जा सके।” — डॉ. अरुण कुमार
* बाढ़ और पलायन का डर: “खो नदी का पुल अधूरा होने से पानी गांव में तबाही मचाता है। खेती और संपत्ति का भारी नुकसान हो रहा है। अगर पुल और ठोकर (नोकी) का निर्माण न हुआ तो हम पलायन को मजबूर होंगे।” — अजय पाल
* अनसुनी हुई शिकायतें: “हमने तहसील प्रशासन, जिला प्रशासन सहित मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पोर्टल पर भी गुहार लगाई, लेकिन आज तक कोई जमीनी कार्रवाई नहीं हुई।” — मोनू कुमार
प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि शासन के सभी बड़े पोर्टल्स और अधिकारियों को सूचित करने के बावजूद लोक निर्माण विभाग (PWD) और ग्राम प्रधान की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगे।
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