लॉक डाउन के नाम पर तंबाकू उत्पादों की ब्लैक मार्केटिंग शुरु

लॉकडाउन की संभावना से तंबाकू उत्पादों पर ब्लैक शुरु। खुदरा मूल्य पर थोक विक्रेता कर रहे तंबाकू उत्पादों की बिक्री। पान मसाला, जर्दा (गुटका), सिगरेट, खैनी पर लिया जा रहा ओवररेट।

बिजनौर। प्रदेश में लॉकडाउन की आशंका को देखते हुए तंबाकू उत्पादों के थोक  विक्रेताओं ने विगत वर्ष लगे लॉकडाउन की तरह ही मोटा मुनाफा कमाने की नीयत से अभी से ओवर रेट पर पान मसाला+जर्दा (गुटका), सिगरेट, खैनी व सुरति आदि की बिक्री शुरु कर दी है। इसके चलते खुदरा दुकानदारों ने भी ग्राहकों से निर्धारित से अधिक दाम वसूलने शुरु कर दिए हैं।

प्रदेश में रोजाना बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के आंकड़ों को देखते हुए तंबाकू उत्पादों की बिक्री करने वाले लोगों ने सबसे पहले काली कमाई करने के लिए अपना गुणा गणित बैठाना शुरु कर दिया है। विगत वर्ष मार्च माह में देश भर में लॉकडाउन लगाए जाने के बाद तंबाकू उत्पादों की बिक्री करने वालों ने पान मसाला, जर्दा, खैनी, सुरति, सिगरेट आदि को निर्धारित से चार गुने दामों तक पर बेचा था। इसका मुख्य कारण तंबाकू उत्पादों के थोक विक्रताओं की ओर से खुदरा दुकानदारों को तंबाकू उत्पाद निर्धारित दरों से तीन गुनी दरों पर बेचा जाना बताया जाता रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के कोविड प्रभावित पांच शहरों प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर और गोरखपुर में आगामी 26 अप्रैल तक लाकडाउन लगाए जाने का आदेश दिया है। इस आदेश की जानकारी होते ही तंबाकू उत्पादों के थोक विक्रेताओं ने खुदरा दुकानदारों से माल न होने की बात कहनी शुरु कर दी। साथ ही सिगरेट, पान मसाला, जर्दा (गुटका), खैनी, सुरती आदि उत्पादों को उनके खुदरा मूल्य पर ही दे पाने के साथ ही बड़ी मात्रा में देने की शर्त भी रख दी है। इसके बाद से खुदरा दुकानदारों ने भी तंबाकू उत्पादों के दामों में इजाफा कर दिया। उधर एक खुदरा दुकानदार ने बताया कि थोक विक्रेताओं ने रोजाना भाव बढऩे के संकेत देते हुए बड़ी मात्रा में माल लेने की पेशकश की है। उपभोक्ताओं ने तंबाकू उत्पादों के दामों पर की जा रही कालाबाजारी पर अंकुश लगाए जाने की मांग की है।

ऊपर तक सैटिंग का दावा!

थोक मार्केट में गुटखे के प्रत्येक पैकेट पर 30 से 40 रुपए, बीड़ी के बंडल पर ₹50 से भी ज्यादा दाम अभी से बढ़ा दिए गए हैं। जनता को आगे से महंगा माल मिलने का हवाला देकर मनमाना दाम वसूला जा रहा है। एक दुकानदार से इस बाबत पूछा गया तो उसने बताया कि जब महंगा मिला है, तो उसी हिसाब से बेचेंगे भी। शिकायत का डर नहीं है, पूछने पर ताल ठोंक कर कहा कोई भी, किसी को भी कर ले शिकायत! थोक वालों की ऊपर तक तगड़ी सैटिंग है। आम ग्राहकों के मन में सवाल ये है कि क्या पिछले साल की तरह इस बार भी कालाबाजारियों पर अधिकारियों की दया दृष्टि बनी रहेगी या प्रशासन की तरफ से कोई उचित व ठोस कार्यवाही की जाएगी।

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