
लखनऊ/देहरादून (एकलव्य बाण समाचार)। कांवड़ यात्रा पर उत्तराखंड सरकार के अंतिम निर्णय न लेने से मामला अभी सुलझा नहीं है। एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। वहीं उत्तराखंड सरकार ने यात्रा पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। ऐसे में विभिन्न राज्यों से गंगा जल लेने हरिद्वार पहुंचने वाले भोले के भक्तों में उहापोह बना हुआ है। हालांकि दोनों मुख्यमंत्रियों की बातचीत के बाद मामला हल होने के आसार बने हैं।
यूपी के अपर मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है, पड़ोसी राज्यों उत्तराखंड व बिहार से संवाद स्थापित कर कांवड़ यात्रा को पूरा किया जाए। वहीं हरिद्वार में कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध है। इसी मंगलवार को पुलिस मुख्यालय देहरादून में डीजीपी अशोक कुमार की अध्यक्षता में कांवड़ यात्रा (23 जुलाई से छह अगस्त) पर चर्चा के लिए अंतरराज्यीय समन्वय बैठक बुलाई गई थी। इसमें सात राज्यों (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब) के 36 पुलिस व इंटेलीजेंस अधिकारियों ने ऑनलाइन व ऑफलाइन भाग लिया। इस दौरान डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि उत्तराखंड शासन ने कांवड़ मेले को पूर्णतया प्रतिबंधित किया है। इस बीच यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सीएम पुष्कर धामी के बीच हुई बात के बाद सरकार ने यू टर्न ले लिया है। सूत्रों का कहना है कि हरिद्वार में प्रतिबंध की गई कांवड़ यात्रा पर अब नए सिरे से पुनर्विचार किया जाएगा।

हरिद्वार में प्रवेश रोकने को सख्ती- सभी राज्य थाना स्तर पर सभी कांवड़ समितियों के साथ बैठक कर इस प्रतिबंध के बारे में उन्हें बताएं। आईजी कानून व्यवस्था वी मुरुगेशन ने कहा कि जो यात्री हरिद्वार की सीमा में प्रवेश करेगा। उनसे कोविड महामारी की गाइडलाइनों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। डीजीपी ने कहा कि कांवड़ मेले पर प्रतिबंध के निर्णय को मीडिया, सोशल मीडिया के माध्यम से सर्कुलेट करना है। यदि शासन के आदेश में कोई फेरबदल होता है तो उसके लिए सभी अधिकारियों का एक व्हाट्एसएप ग्रुप बनाया गया है। इस पर सभी को समय से अवगत करा दिया जाएगा। पिछले साल 15 मार्च को प्रदेश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला मिला था। संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार ने कांवड़ यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया था। साथ ही सरकार ने यह भी फैसला लिया था कि शिव भक्तों को गंगा जल उन्हीं के राज्यों में उपलब्ध कराया जाएगा।

केस भी, 14 दिन क्वारंटीन भी- उत्तराखंड में फिलहाल कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध है। ऐसे में जो भी कांवड़ लेकर हरिद्वार आएगा उस पर कार्रवाई की जाएगी। उस पर मुकदमा दर्ज करने के साथ 14 दिन के लिए क्वारंटीन भी किया जा सकता है।
स्थानीय श्रद्धालुओं की संख्या कम- केवल 1.6 प्रतिशत होते हैं स्थानीय श्रद्धालु
कांवड़ मेले में जल लेने के लिए स्थानीय लोगों की संख्या बेहद कम रहती है। वर्ष 2019 में कांवड़ मेले में करीब तीन करोड़ श्रद्धालु आए थे। इनमें से स्थानीय यात्रियों की संख्या महज 1.6 प्रतिशत थी। सबसे अधिक हरिद्वार 32 प्रतिशत और फिर उत्तर प्रदेश 27 फीसदी थी। पिछले साल कांवड़ यात्रा नहीं हुई थी।


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