
झूठे विज्ञापन के सहारे चलने वाली बीजेपी सरकार चंद महीनों के संविदा कार्यकाल पर है –प्रशांत कन्नौजिया
लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं। सभी राजनीतिक पार्टियों में आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। दलित व पिछड़ा वोट बैंक के खातिर आपसी खींचतान शुरू हो चुका है। हाल में ही राष्ट्रीय लोक दल ने पत्रकार व एक्टिविस्ट प्रशांत कन्नौजिया को एससी एसटी विंग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है।
जानकारों का मानना है कि यूपी में दलित समाज से आने वाले प्रशांत कनौजिया को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर उत्तर प्रदेश की दलित वोटबैंक की राजनीति करने वाले के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
आरएलडी राष्ट्रीय अध्यक्ष (एससी एसटी विंग) प्रशांत कन्नौजिया से हमारे संवाददाता मधुसूदन की बातचीत के अंश…
1. सरकार के खिलाफ लगातार बोलने वाले पत्रकार ने राजनीति का रास्ता क्यूं चुना?
भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था पतन की ओर है। पत्रकारिता के दौरान सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ बोलने पर मुझे जेल में डाल दिया। जेल में मुझे प्रताड़ित किया गया। बाबा साहेब ने कहा था राजनीति हर मुश्किलों की कुंजी है।
आरएलडी सामाजिक न्याय की बात करती है। इसी कारण आरएलडी को चुना।
2. आगामी यूपी विधानसभा चुनाव आरएलडी किन मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी?
आरएलडी का मुद्दा जनता के लिए कमाई, दवाई, सिंचाई, पढ़ाई व सामाजिक न्याय है। योगी सरकार में दलित, पिछड़ों व किसानों का जीना मुश्किल है। बेरोजगारी, महंगाई, बहुजन व महिलओं के प्रति बढ़ते अपराध ने जनता का जीना मुश्किल कर दिया है।
3. सरकार कहती है कि पिछली सरकार के तुलना में यूपी में अपराध घटा है?
जब जनपद बिजनौर में नेशनल खोखो प्लेयर की सरेआम हत्या कर दी जाती है, इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि कानून व्यवस्था का क्या हाल है? बीजेपी, आरएसएस के लोग दलित समाज को टारगेट कर मनोबल तोड़ने का कार्य करते हैं। वहीं गोदी मीडिया सुशांत सिंह राजपूत केस पर खूब छिलती है और खोखो प्लेयर की हत्या पर चुप्पी साध लेती है।
4. वर्तमान सरकार को आप रोजगार सृजन के मामले में कितना सफल मानते हैं?
योगी आदित्यनाथ केवल फीता काटने वाले मुख्यमंत्री हैं। सारी भर्ती व काम अखिलेश यादव की देन हैं। दो करोड़ रोजगार देने का वादा करने वाले केवल झूठे विज्ञापन में मात्र चार लाख रोजगार दे पाए। इससे बड़ी शर्म की बात क्या हो सकती है? प्रतियोगी छात्रों को लखनऊ में पुलिस का डंडा खा रहा है। राजा अपने महल में मस्त है।
5. किसान आंदोलन आगामी यूपी चुनाव में कितना असर डालेगा?
किसान आंदोलन में पिछले 6 महीनों से सड़क पर अपना हक मांग रहा है, लेकिन 300 किसानों की मौत पर चुप्पी साधने वाली सरकार अल्लाह हू अकबर, हर हर महादेव के एकता वाले नारे से तुरंत एक्टिव हो जाती है, क्योंकि आरएसएस केवल तोड़ने व विध्वंसकारी राह की राजनीति करती है। किसान बीजेपी के ताबूत पर आखिरी कील ठोकेगा। बीजेपी बहुजन मुस्लिम की एकता से डरती है।
6. आरएलडी द्वारा आयोजित न्याय यात्रा के पीछे क्या मकसद है?
बीजेपी सरकार में दलितों पिछड़ों के ऊपर हो रहे अत्याचार के खिलाफ ये लड़ाई है। दलित व महिलाओं के प्रति अपराध को 2022 में सरकार बनाने के बाद इसका हिसाब करेंगे। बहुजन आने वाले समय में बीजेपी की ईट से ईट बजा देगा। यह न्याय यात्रा सहारनपुर से शुरू होकर पूरे यूपी में होगी। इसका समापन 9 अक्टूबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी आगरा में करेंगे।
7. आरएलडी का जातीय जनगणना पर क्या मानना है?
बीजेपी जातिगत जनगणना से इसलिए डर रही है क्योंकि इनका झूठा गुब्बारा फूट जायेगा और बहुजन को अपनी असली ताकत का एहसास हो जायेगा। जितनी जिसकी संख्या भारी, उतनी उसकी हिस्सेदारी। बहुजन समाज के बनने वाली योजनाओं के खातिर जातीय जनगणना का होना जरूरी है।
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