–अपनी संपत्ति हासिल करने को छटपटा रहा नजीबाबाद पालिका प्रशासन
-नगीना चुंगी भवन पर है बरसों से अवैध कब्जा
-कोर्ट के आदेश भी बेमानी साबित
बिजनौर। नजीबाबाद के ग्राम छापर मोहल्ला मुगलुशाह स्थित सरकारी चुंगी भवन से अवैध कब्जा हटाने में पालिका प्रशासन असहाय साबित हो रहा है। बताया गया है कि 14 अगस्त 2015 में इस पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा करके दो मंजिला भवन का निर्माण कर लिया। नगर पालिका नजीबाबाद प्रशासन तब से लगातार उक्त भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है परन्तु कब्जाधारकों में कानूनी कार्यवाई को लेकर भी कोई भय नहीं है।
जानकारी के अनुसार नजीबाबाद के ग्राम छापर मोहल्ला मुगलूशाह में सरकारी नगीना चुंगी का भवन जीर्णशीर्ण अवस्था में था। वर्ष 1995 में श्रीमती शकुरन ने न्यायालय सिविल जज जूनियर डिविजन नजीबाबाद में याचिका दायर कर उक्त भूमि पर अपना हक जताया था। अक्टूबर 1999 में न्यायालय द्वारा वाद खंडित कर दिया गया था। इसके बाद श्रीमती शकुरन ने दिसम्बर 2015 में अनाधिकृत रूप से उक्त चुंगी भवन को नेस्तनाबूद कर पक्का निर्माण कार्य शुरू करा दिया था। पालिका प्रशासन तब से लेकर 14 अगस्त 2019 तक कई बार उक्त महिला को कब्जा हटाने को लेकर लिखित नोटिस दिया गया, उसके बावजूद अभी तक उस पर अवैध कब्जा बना हुआ है।

यह भी विदित है कि 5 सितम्बर 2019 को थाना नजीबाबाद के तत्कालीन वरिष्ठ उप निरीक्षक जितेन्द्र सिंह द्वारा पालिका प्रशासन से उक्त चुंगी चौकी नगीना के सम्बंध में जानकारी हासिल की गई थी। तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने 9 सितम्बर 2019 को रिपोर्ट प्रस्तुत कर उक्त मोहल्ला मुगलूशाह स्थित चुंगी चौकी को पालिका की सम्पत्ति बताते हुए, कहा कि उक्त संपत्ति के स्वामी पालिका परिषद है। यह भी बताया कि पालिका के सम्पत्ति रजिस्टर में खसरा नं- 226/18 पालिका सम्पत्ति के रूप में दर्ज है और उक्त सम्पत्ति को बेचने का अधिकार किसी को भी नहीं है। खास बात यह है कि इतने वर्ष बीतने के बावजूद पालिका प्रशासन के हाथ खाली हैं। अवैध कब्जाधारक ने अपनी पहुंच के चलते सरकारी संपत्ति पर कब्जा जमाया हुआ है और पालिका प्रशासन उसे हासिल करने के लिए छटपटा रहा है।
कार्रवाई कराएंगे एसडीएम- वहीं इस मामले में उपजिलाधिकारी नजीबाबाद मनोज कुमार ने बताया कि उनके संज्ञान में यह मामला अभी आया है। उन्होंने एक माह पूर्व ही ज्वाइन किया है। वह पालिका प्रशासन से पता करेंगे कि अभी तक उक्त भूमि को कब्जा मुक्त क्यों नहीं कराया गया। आवश्यक हुआ तो न्यायालय की अवमानना का वाद भी दायर कराया जाएगा।
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