
बिजनौर। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के एक प्रतिनिधिमंडल ने कृषि उत्पादन आयुक्त उत्तर प्रदेश लखनऊ से मुलाकात कर किसानों की समस्याओं के विषयों पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न समस्याओं से संबंधित ज्ञापन देकर उनके समाधान की मांग की और कहा कि उत्तर प्रदेश में सूखा पड़ने से किसान काफी गंभीर स्थिति में है। अगली फसल के लिए निवेश के पैसे भी उसके पास नहीं हैं। ऐसे में किसान को राहत दिया जाना आवश्यक है। कई विषयों पर कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार से वार्ता की गई। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश सिंह चौहान के नेतृत्व में वार्ता में धर्मेंद्र मलिक राष्ट्रीय प्रवक्ता, हरिनाम सिंह वर्मा प्रदेश अध्यक्ष, दिगंबर सिंह युवा प्रदेश अध्यक्ष मौजूद रहे। ज्ञापन में कहा गया कि कृषि एवं किसान की समस्या हमेशा लगी रहती है। कभी सरकारी नीतियों तो कभी प्रकृति के साथ न देने के कारण किसान पर कर्ज का भार बढ़ता जा रहा है। सरकार द्वारा समय समय पर किसानो को राहत दी जा रही है,लेकिन वह नाकाफी है
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में बारिश न होने के कारण किसान अपनी बुवाई समय से कर नही पाए और जितनी बुवाई हुई उसे फसलों को बचाने में काफी खर्च करना पड़ रहा है। हाल में हुई बारिश ने किसानो की परेशानी को अधिक बढ़ा दिया है
खेती को लाभप्रद बनाने हेतु सरकार को छोटे बड़े हजारों कदम उठाने की आवश्यकता है।
किसानों को राहत दिए जाने के लिए भारतीय किसान यूनियन की मांग…
1-प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों के सभी देय पर अगली फसल की बिक्री तक रोक लगाई जाए
2-किसानों के कर्ज (राज्य/केंद्र) पर वर्तमान सीजन का ब्याज सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में दिया जाए। 6 माह के बिजली बिल माफ किए जाए।
3-आगामी सीजन में फसल बुवाई हेतु किसानों को उन्नत एवं गुणवत्ता युक्त बीज नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाए। किसानों को खाद व कीटनाशक कर्ज पर दिए जाए।
4-उत्तर प्रदेश में कुछ चीनी मिलों द्वारा भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। किसानों को बुवाई से पहले भुगतान कराया जाए।
5-बारिश की कमी के कारण गन्ने में रेड रोट,केंसर व धान में बौनेपन की समस्या की कारण उत्पादन में लगभग 30% की कमी की संभावना है, लेकिन इस बार फसल उत्पादन के निवेश में वृद्धि हुई है। किसानों को राहत दिए जाने हेतु गन्ना मूल्य में वृद्धि व धान के किसानों को बोनस दिया जाए।
6-आवारा पशुओं की समस्या किसानों के जी का जंजाल बन चुकी है। गौशालाओं की क्षमता वृद्धि के साथ साथ गंगा नदी के किनारे गाय अभिहरण बनाए जाय। अन्ना प्रथा पर कानूनी प्रतिबंध लगाया जाए।
7-सभी अनुदानित उर्वरक की पैकिंग पर क्यूआर कोड के हर कंपनी की पहचान के लिए आवश्यक किया जाए, जिससे नकली उर्वरकों पर रोक लगाने में मदद होगी।
8-कृषि विभाग के तहसील स्तरीय कार्यालय सुचारू रूप से संचालित किए जाए। इनके संचालन हेतु बजट की व्यवस्था की जाए। स्कीम को लागू करने की अधिकार तहसील स्तर के अधिकारियों को दिए जाए।
9-नवसर्जित जनपदों में सामान्य जनपदों के अनुरूप कर्मचारी तैनात किए जाए। नव सृजित तहसीलों में कृषि विभाग के कार्यालय खोले जाए।
10-कृषि रक्षा केंद्रों को प्रभावी बनाने हेतु उन्नत बीज,कीटनाशक,खरपतवार नाशक की गुणवत्ता में सुधार किया जाए।
11- कृषि विभाग में जिप्सम के दाम दोगुने हैं, जो सब्सिडी के बाद भी महंगा है। इसकी जांच की जाए।
12-कृषि प्रसार का कार्य प्रदेश भर में नगण्य है, जिसके कारण किसानों को खेती कीटनाशक, उर्वरक बेचने वाले दुकानदार की सलाह पर करनी पड़ रही है। समय समय पर किसानों को एडवाइजरी जारी की जाए। सभी कृषि विज्ञान केंद्रों को सक्रिय किया जाए।
13-प्रदेश में नहरों की सफाई का कार्य ऐसे समय किया जाता है जब किसानों को पानी की आवश्यकता होती है। किसानों को पानी की जल्दी के बहाने सफाई की धनराशि बंदरबाट की भेट चढ़ जाती है, इसलिए नहरों की सफाई समय के अनुकूल व मैनुवल कराई जाए।
14-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चौगामा नहर के निर्माण पर सरकार द्वारा हजारों करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी आज तक पानी टेल तक नहीं पहुंच पाया है। चौगामा नहर से डार्क जोन वाले 4जनपदों का लाभ होगा। चौगामा नहर में कम से कम बारिश के समय ही पानी दिया जाए, जिससे भूगर्भ के गिरते जलस्तर को रोका जा सके।
15-धान खरीद की सुचारू व्यवस्था किए जाने हेतु समय पर सभी क्रय केंद्र चालू किए जाए। तराई क्षेत्र में धान की अनाधिकृत बिक्री राइस मिल, मंडियों के बाहर खरीद करने वालो पर कार्यवाही की जाए।
16-पूर्व की भांति अगले माह के मध्य कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में कृषि से संबंधित सभी अधिकारियों के साथ भाकियू अराजनैतिक के पदाधिकारियों के साथ बैठक कराई जाए।
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