राम-भरत मिलाप जुलूस में विवाद
- अधिवक्ता पर हमले के खिलाफ कार्य बहिष्कार, पुलिस को दी तहरीर
- दूसरे पक्ष का आरोप भारतीय संस्कृति को खत्म करने की साजिश
बिजनौर। एक अधिवक्ता ने राम-भरत मिलाप जुलूस के दौरान खुद पर जानलेवा हमले का आरोप लगाया है। हमलावरों पर रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए अधिवक्ताओं ने शुक्रवार को कार्य बहिष्कार किया। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मामला आपसी विवाद का विवाद बताया जा रहा है!

गुरुवार देर रात राम-भरत मिलाप का जुलूस शहर में धूमधाम से निकाला गया। जुलूस में सबसे आगे अखाड़े चल रहे थे। नगरपालिका चौक पर अखाड़े के दौरान रामलीला कमेटी के एक पदाधिकारी और अन्य कुछ लोगों में किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कहासुनी के बाद लोगों ने दोनों पक्षों को समझाबुझाकर शांत कर दिया। लेकिन, शुक्रवार को एक पक्ष के अधिवक्ता होने के कारण मामला तूल पकड़ गया। अधिवक्ताओं ने पुलिस से सुरक्षा और दूसरे पक्ष की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी। इसके चलते हजारों फरियादियों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। इस संबंध में पुलिस को तहरीर भी दी गई।
भारतीय संस्कृति और परंपरा को खत्म करने की साजिश? उधर, दूसरे पक्ष का कहना है कि कुछ लोग भारतीय संस्कृति और परंपरा को खत्म करना चाहते हैं। इसके चलते वह लगातार कई साल से अखाड़ों के विरोध में है। आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष ने रामलीला कमेटी में गबन किया था, जिसके चलते उसने कमेटी से कुछ साल पहले इस्तीफा दे दिया था। तभी से दूसरा पक्ष उससे रंजिश रखता है। इसलिए जानबूझकर मामूली बात को तूल दिया जा रहा है। अखाड़ों को रामलीला के जुलूस से सदा के लिए खत्म कर भारत की लोक कलाओं को खत्म करने की साजिश रची जा रही है।
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