निकाय चुनाव: जिसका हमें था इंतजार…वो घड़ी आ गई
स्योहारा नगर पालिका अस्तित्व में आने के बाद अभी तक नहीं हुई आरक्षित
~आकाश तोमर
स्योहारा (बिजनौर)। लंबे इंतजार और तमाम आशंकाओं व संभावनाओं के बीच नगर निकायों की अध्यक्ष पद आरक्षण सूची सोमवार शाम को जारी हो गई। इसे देख स्योहारा में न सिर्फ संभावित चेयरमैन प्रत्याशियों के चेहरे खिल उठे बल्कि समर्थकों ने भी मिठाई बांटने के साथ आतिशबाजी कर खुशी मनाई। जश्न का महौल देख लगा कि कस्बे के बाशिंदों को शायद इसी घड़ी का इंतजार था। स्योहारा नगर पालिका सन 1952 से 1974 तक नगर पंचायत हुआ करती थी। 1974 में नगर पालिका का गठन हुआ, जिसके बाद सन 1986 में नगर पालिका का भवन बन कर तैयार हुआ। सन 1988 में पहली बार हाजी मसूद उल हसन नगर पालिकाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे। 1993 पुनः हाजी मसूदउल हसन ने चुनाव जीता। सन 2002 के पालिकाध्यक्ष चुनाव में अख्तर जलील ने हाजी मसूद उल हसन को हरा कर चुनाव जीता। वर्ष 2007 से 2017 तक पूर्व विधायक हाजी नईमुलहसन की पत्नी तरन्नुम मलिक नगर पालिका की कुर्सी पर लगातार दस वर्षो तक पालिका चैयरपर्सन की कुर्सी पर विराजमान रहीं। 2017 के चुनाव में अख्तर जलील पालिकाध्यक्ष बने। उनको 6731 वोट मिले जबकि भाजपा प्रत्याशी मुकेश कुमार रस्तौगी को 4930 वोट मिले और दूसरे नंबर पर रहे, जबकि समाजवादी प्रत्याशी नईमुहसन को 4828 वोट मिले और तीसरे नंबर पर रहे। सन 1988 से लगातार स्योहारा नगर पालिका की सीट आरक्षण में सामान्य होती चली आ रही है। इस कारण किसी अन्य जाति के प्रत्याशी को नगरपालिका की कुर्सी पर बैठने का मौका नहीं मिला। कुछेक जहां अध्यक्ष पद दूसरे वर्गों के लिए आरक्षित होने की आशंका जता रहे थे वहीं कई प्रत्याशियों को सीट अनारक्षित श्रेणी में आने की उम्मीद थी। यहां निकाय चुनाव में सामान्य वर्ग से अध्यक्ष पद के कई संभावित प्रत्याशी तो आरक्षण स्पष्ट न होने के चलते चुप्पी साधे हुए थे। बहरहाल सोमवार शाम जारी हुई आरक्षण सूची में जैसे ही स्योहारा नगर पालिका अनारक्षित घोषित हुई, संभावित प्रत्याशियों और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने मिठाईं बांटने के साथ जमकर आतिशबाजी की। दूसरी ओर नगर पालिका अध्यक्ष पद की सीट अनारक्षित होने से आरक्षित सीट की संभावना को लेकर चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों के चेहरों पर मायूसी छा गई।
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