पंचायत सचिव ने लिख डाली भ्रष्टाचार की नई इबारत!
गजब: पंचायत सचिव के खेल निराले, बिना काम किए पेमेंट निकाले
बिजनौर। विकास खण्ड नूरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत ताजपुर में तैनात ग्राम विकास अधिकारी / सचिव अवधेश कुमार ने भ्रष्टाचार की नई इबारत लिख डाली है। ट्राईसाईकिल / ई-रिक्शा सप्लाई, सॉकपिट गड्ढों के निर्माण, प्रधान की जानकारी के बिना डोंगल से भुगतान आदि कई आरोप जांच में सत्य पाए गए हैं!? फिलहाल जिला विकास अधिकारी एस०कृष्णा ने शिकायतों की जांच में गम्भीर वित्तीय अनियमितता पाए जाने के बाद उसकी 10 वार्षिक वेतन वृद्धियों को घटा दिया है। … लेकिन सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आरोपी को आखिर किस कारण तैनाती स्थल से हटाकर मूल वेतन पर सवेतन बहाल करते हुए विकास खण्ड नजीबाबाद में तैनात किया गया?

जिला विकास अधिकारी एस०कृष्णा द्वारा बताया गया है कि ग्राम विकास अधिकारी / सचिव अवधेश कुमार ने ताजपुर ग्राम प्रधान की जानकारी में लाये बिना ही नोएडा की किसी फर्म से रिक्शा सप्लाई करने से पहले ही 10,24,848 / – रुपए हस्तान्तरित कर दिए। यह भी पता चला कि उक्त रिक्शा ग्राम पंचायत ताजपुर को उपलब्ध कराए ही नहीं गए। इस आरोप में उसे तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया। इस प्रकरण में खण्ड विकास अधिकारी मो०पुर देवमल / जांच अधिकारी द्वारा सचिव के विरुद्ध पांच आरोप गठित करते हुए नियमानुसार आरोप पत्र उसको उपलब्ध कराया गया।
आदेश के दो महीने पहले ही खरीद लिया सामान?
सचिव अवधेश कुमार ने ई-रिक्शा का क्रय किये जाने में मिशन निदेशक स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के निर्देशों का पालन नहीं किया। नियमानुसार ग्राम पंचायत में तैनात ग्राम पंचायत सचिव का दायित्व है कि शासकीय धनराशि का व्यय वित्तीय नियमों का पालन करते हुए किया जाये। इस सम्बन्ध में शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कचरा एकत्रीकरण हेतु ट्राईसाईकिल / ई-रिक्शा (बैटरी ऑपरेटेड) इत्यादि सामग्री की खरीद जैम पोर्टल के माध्यम से की जाए। मजेदार बात यह है कि डीएम ने राजस्व ग्रामों को उत्कृष्ट श्रेणी (Model) में ओडीएफ प्लस ग्राम बनाए जाने हेतु तैयार ग्राम स्वच्छता प्लान को जनपद बिजनौर की कार्य योजना का प्रस्तुतीकरण राज्य स्तरीय समिति के समक्ष दिनांक 06 जुलाई 2022 को निर्धारित किया, जबकि सचिव ने दो महीने पहले ही सामान खरीद लिया। सचिव महोदय ने 06 मई 2022 के समाचार पत्र की प्रति संलग्न कर दी। जांच का विषय यह है कि कार्य योजना के प्रस्तुतीकरण के पूर्व की तिथि में ई-रिक्शा क्रय करने को विज्ञप्ति समाचार पत्र में प्रकाशित कैसे हो सकती है? इस मामले में यह भी जांच का विषय है कि उक्त समाचार पत्र की प्रति किस जुगाड से सूचना विभाग में जमा कराई गई होगी? समाचार पत्र के कार्यालय से भी जानकारी हासिल कर सचिव के खिलाफ और पुख्ता सबूत के साथ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

मिशन निदेशक, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण उ०प्र० के पत्र संख्या 5 / 1004 / 2022-5/35/2022, दिनांक 08 सितम्बर 2022 जो कि समस्त जिला पंचायत राज अधिकारी को सम्बोधित है, में जेम पोर्टल एवं इण्डियामार्ट वेबसाईट पर 500 कि०ग्रा० क्षमता एवं 300 कि०ग्रा० क्षमता के 02 अलग-अलग डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन हेतु ई-रिक्शा के विस्तृत विनिर्देश (स्पेसिफिकेशन) तैयार कर इस निर्देश के साथ प्रेषित किये गये थे कि प्रस्तावित स्पेसिफिकेशन के अनुसार ई-रिक्शा जिसमें गुणवत्ता परक पार्टस, गारण्टी / वारण्टी, सर्विसिंग / मेन्टेनेन्स आदि की समुचित व्यवस्था हो, को क्रय किया जा सकता है। स्पष्ट है कि अपचारी कर्मचारी (ग्राम विकास अधिकारी / सचिव अवधेश कुमार) द्वारा क्रय किये गये ई-रिक्शा के सम्बन्ध में मिशन निदेशक द्वारा निर्धारित किये गये स्पेसिफिकेशन का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इस प्रकार अपचारी कर्मचारी द्वारा पूरी क्रय प्रक्रिया वित्तीय नियमों के विपरीत एवं मनमाने तरीके से की गयी है।
अंकुर शर्मा की भूमिका?
दिनांक 10 नवंबर 2022 को एक ही दिन में 11 सॉकपिट गड्ढों के निर्माण हेतु शेखावत कान्ट्रेक्टर एण्ड सप्लायर जिसके प्रो० बिजेन्द्र सिंह पुत्र चन्द्रपाल सिंह निवासी ग्राम जुझेला तहसील चान्दपुर को कुल रुपए 1,12,34,800 का भुगतान जनपद मुख्यालय पर ग्राम प्रधान के डोंगल से जिला पंचायत राज कार्यालय में तैनात अंकुर शर्मा द्वारा लगाकर फर्म को किया गया है? साथ ही दिनांक 10 नवंबर 2022 को ही 05 कचरा वाहन ई-रिक्शा खरीद हेतु संस्कार एण्टरप्राईजेज प्रो० ललित कुमार जोशी नांगल सोती जनपद बिजनौर की फर्म को कुल रुपए 9,12,500-00 का भुगतान करने के लिए भी ग्राम प्रधान का डोंगल जिला पंचायत कार्यालय बिजनौर में तैनात अंकुर शर्मा जिला कार्डिनेटर द्वारा लगाया गया। ग्राम प्रधान को न तो क्रय प्रक्रिया की जानकारी दी गयी और न ही डोंगल का उपयोग किस कार्य के लिये किया जा रहा है, इसकी जानकारी दी गयी। जांच में यह आरोप सिद्ध पाया गया।
एक और नया खेल
भ्रष्ट ग्राम पंचायत सचिव ने एक और नया खेल कर डाला। सामान की खरीद के आदेश पर ग्राम प्रधान एवं सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर हैं। ग्राम प्रधान के अनुसार डोंगल लेकर वह अपने पति एवं भांजे के साथ जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय आयीं थी और उनको नीचे बैठा दिया गया। उसके बाद की कोई जानकारी उनको नहीं थी कि उनके डोंगल का उपयोग भुगतान के लिये किया गया है। साथ ही सचिव ने क्रय किये गये ई-रिक्शा के सम्बन्ध में मिशन निदेशक द्वारा निर्धारित किये गये स्पेसिफिकेशन के अनुसार पूरी प्रक्रिया स्टोर पर्चेज रूल्स नियमों के विपरीत जाकर एवं मनमाने तरीके से की। यह आरोप आंशिक रूप से सिद्ध पाया गया।
ऑडियो क्लिप भी कारगर सबूत
ग्राम प्रधान पति के भांजे एवं ग्राम प्रधान पति से वार्ता के आडियो क्लिप से भी साबित हुआ है कि सचिव अवधेश कुमार ने ई-रिक्शा क्रय की पूर्ण प्रक्रिया के सम्बन्ध में ग्राम प्रधान को कोई जानकारी नहीं दी। उसने उच्च अधिकारियों के नाम का सहारा लेकर ग्राम प्रधान को गुमराह किया।
प्रधान को गुमराह कर ओडीएफ अकाउंट से निकाले लाखों
अपचारी कर्मचारी / सचिव अवधेश कुमार द्वारा ग्राम प्रधानपति के भांजे एवं ग्राम प्रधान पति से की गई वार्ता की आडियो क्लिप में पाया गया कि ग्राम पंचायत ताजपुर के ओडीएफ एकाउण्ट से दिनांक 10 नवंबर 2022 को 10,24,848-00 रू० निकालने के बाद भी दिनांक 27 नवंबर 2022 को मोबाईल पर अपचारी कर्मचारी से किये गये भुगतान के बारे में मना करना भी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ग्राम प्रधान को धनराशि निकालने की जानकारी नहीं दी गयी। रिक्शा प्राप्त किये बिना ही धनराशि सम्बन्धित फर्म के खाते में हस्तान्तरित की गयी। जांच में यह आरोप भी सिद्ध पाया गया।
…और भी हैं आरोप
ग्राम विकास अधिकारी / सचिव अवधेश कुमार द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्य में संस्कार एण्टरप्राईजेज को ई-रिक्शा की आपूर्ति हेतु निर्गत क्रय आदेश में ग्राम प्रधान एवं अवधेश कुमार के संयुक्त हस्ताक्षर पाये गये। अपचारी कर्मचारी अवधेश ने अपने जवाब के साथ जनपद की कई ग्राम पंचायतों में आपूर्ति किये गये ई-रिक्शा के बिल जो कि इसी फर्म के हैं, में लागत धनराशि एक समान रूप अंकित पायी गयी। अपचारी कर्मचारी द्वारा 11 सॉकपिट गडढों से सम्बन्धित उपलब्ध कराये गये अभिलेख एवं फोटोग्राफ के अनुसार यह कार्य पूर्ण है, किन्तु 05 ई-रिक्शा जिनकी लागत 9,12,500-00 रू0 है, उसकी आपूर्ति भुगतान एवं शिकायत के बाद ग्राम पंचायत को प्राप्त हुई है। चूंकि ग्राम प्रधान को पूरी कय प्रक्रिया एवं भुगतान की जानकारी अपचारी कर्मचारी द्वारा नहीं दी गयी, इसलिए यह आरोप आंशिक रूप से सिद्ध पाया गया।
5 आरोप में से 3 में पूर्ण और 2 में आंशिक दोषी
जाँच अधिकारी की जाँच आख्या का अवलोकन / परीक्षण करने से स्पष्ट हुआ कि सचिव अवधेश कुमार पर लगाये गये पाँचों आरोपों में से तीन में वह पूर्ण रूप से तथा दो आरोपों में आंशिक रूप से दोषी है। साबित हो गया कि सचिव द्वारा गम्भीर वित्तीय अनियमितता की गयी। निलम्बित ग्राम विकास अधिकारी / अपचारी कर्मचारी अवधेश कुमार निलम्बन से पूर्व कुल रू0 45400 / – मूल वेतन पा रहे थे। अनुशासनिक कार्यवाही नियमावली 1999 में निहित प्राविधानों के अनुसार दण्डस्वरूप उनकी पिछले 10 वार्षिक वेतन वृद्धियों को घटाते हुए कुल रू0 34900/- मूल वेतन पर सवेतन बहाल करते हुए विकास खण्ड नजीबाबाद में तैनात कर दिया गया।
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