गलत नंबर लिखे होने से मंजिल की तलाश में भटकते हैं मरीज और तीमारदार

कुछ ऐसा है ऋषिकेश एम्स का हाल…!
ऋषिकेश। करोड़ों रुपए की लागत से बने एम्स का हाल बेहाल है। सर्वर ठप होने से परेशान मरीज और उनके तीमारदार जांच रिपोर्ट हासिल करने के लिए कई कई दिन भटकते रहते हैं। वहीं बद इंतजामी का शिकार शौचालयों का प्रयोग करना किसी के लिए भी दूभर हो गया है। प्रत्येक मंजिल पर नंबर गलत लिखे होने से लोग हैरान परेशान रहते हैं। मंजिल दो पर तीन, तीन पर चार आदि गलत लिखा होने से अधिकांश लोग भ्रमित होकर मंजिल की तलाश में भटककर अपना बेशकीमती वक्त बर्बाद करते हैं।

ऋषिकेश में करोड़ों रुपए की लागत से बने एम्स का हाल बेहाल हो गया है। यहां आने वाले मरीज और उनके तीमारदार अनेक तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है।
बद इंतजामी का शिकार शौचालयों का प्रयोग करना किसी के लिए भी दूभर हो गया है। यहां प्रत्येक मंजिल पर शौचालय हैं, लेकिन अधिकांश टूटे फूटे पड़े हैं। वाश बेसिन तो हैं, बस टोंटियों से पानी नहीं निकलता।


अधिकांश ठप रहता है सर्वर
सर्वर ठप होने से परेशान मरीज और उनके तीमारदार जांच रिपोर्ट हासिल करने के लिए कई कई दिन भटकते रहते हैं। बताया गया है कि अपनी जांच रिपोर्ट हासिल करने के लिए लोग परेशान रहते हैं। लापरवाही भी हद पार कर चुकी है। अभी हाल ही में मुरादाबाद की एक महिला के अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के साथ ही महीनों से चल रहे इलाज के पर्चे व अन्य कागजात आश्चर्यजनक रूप से गायब हो गए। डिपार्टमेंट ऑफ रेडियो डायोग्नोसिस एंड इमेजिंग में तैनात कर्मचारी महिला को लगातार टहला रहे हैं। महिला इस बात को लेकर परेशान है कि पुराना रिकार्ड आखिर लाए तो लाए कहां से?

एक्स – रे, अल्ट्रा साउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई की स्थिति ऑन स्क्रीन देखने को लोग तरस जाते हैं। कर्मचारी लगातार सर्वर डाउन होने की दुहाई देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। रिपोर्ट ऑन लाइन हासिल करना भी टेढ़ी खीर है। एम्स की साइट खोलते खोलते लोग थक हार कर बैठ जाते हैं।

मंजिल की तलाश में भटकते हैं मरीज और तीमारदार
प्रत्येक मंजिल पर नंबर गलत लिखे होने से लोग हैरान परेशान रहते हैं। मंजिल दो पर तीन, तीन पर चार आदि गलत लिखा होने से अधिकांश लोग भ्रमित होकर मंजिल की तलाश में अपना बेशकीमती वक्त बर्बाद करते हैं। यही नहीं लगभग हरेक बिल्डिंग में लगी लिफ्ट भी सही हालत में नहीं हैं। लोगों को सीढ़ियों का उपयोग करना पड़ता है।

दुर्दशा का शिकार वाहन पार्किंग स्थल
इसी तरह वाहन पार्किंग स्थल भी दुर्दशा का शिकार है। ड्यूटी पर मौजूद गार्ड की फौज भी यहां लाचार है। लोग बेतरतीब तरीके से अपने वाहन खड़े कर निकल लेते हैं और जरूरत पर अन्य लोगों को अपना वाहन वहां से निकालने के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।


चिकित्सा अधीक्षक के आदेश, निर्देश का भी पालन नहीं
चिकित्सा अधीक्षक द्वारा अस्पताल के सभी संकाययण / रेजीडेंटस डाक्टर्स / नर्सिंग आफिसर्स व अन्य स्टाफ को दिए गए आदेश, निर्देश का भी पालन नहीं किया जा रहा। स्पष्ट कहा गया है कि वे वार्डों व अस्पताल के अन्य स्थानों पर कोविड अनुकूल व्यवहार का पालन करें। अस्पताल के रोगी से सम्बन्धित क्षेत्रों व भीड़भाड़ क्षेत्रों वाली जगहों में मास्क प्रयोग करना, सामाजिक दूरी बनाए रखना, साबुन / सेनेटाइजर से हाथ की सफाई नियमित रूप से करें तथा ओपीडी क्षेत्रों में मरीज के रिश्तेदारों से दूरी बनाए रखें। इसके बावजूद अधिकांश बिना मास्क पहने देखे जा सकते हैं।
किसी काम की नहीं संवाद डेस्क
मरीजों और उनके तीमारदारों की सुविधा के लिए संचालित संवाद डेस्क भी किसी काम की नहीं। कई जगहों पर इस पर संपर्क के लिए मोबाइल और व्हाट्सएप नंबर +91 72170 14336 अंकित है। इसके बावजूद संपर्क करने पर कोई रिस्पॉन्स नहीं मिलता। यही नहीं अस्पताल का मोबाइल नंबर 084750 00144 या तो व्यस्त मिलेगा या फिर कॉल रिसीव नहीं की जाएगी। इस संबंध में पीआरओ एम्स हरीश थपलियाल से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
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