बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के संस्कृत विभाग में मनाया गया विश्व संस्कृत-सप्ताह
देश-विदेश के विद्वान हुए सम्मिलित
लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में विश्व संस्कृत-सप्ताह मनाया गया। संस्कृत एवं वैदिकाध्ययन विभाग, बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित इस महोत्सव में भारत एवं विदेश के नामचीन विद्वानों नें संस्कृत विषयक अपनें मन्तव्य प्रस्तुत किया।

प्रथम दिन अम्बेडकर सामाजिक अध्ययन संस्थान के सभागार में ऑफ लाइन उद्घाटन सत्र वैदिक एवं लौकिक मंगलाचरण के साथ प्रारम्भ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में नव नालन्दा महाविहार के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर विजय कुमार कर्ण का ‘संस्कृतस्य विकास यात्रा पन्थाह्वानं समाधानञ्च (संस्कृत की विकास यात्रा: चुनौतियां एवं समाधान) विषय पर व्याख्यान हुआ।

कार्यक्रम में संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. रिपुसूदन सिंह, शिक्षा शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. हरिशंकर सिंह, प्रो. राजशरण शाही, प्रो. सुभाष मिश्र आदि की उपस्थिति रही। इस अवसर पर संकायाध्यक्ष प्रो संजय कुमार का आशीर्वचन सन्देश प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में विभागीय छात्रों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। कार्यक्रम का संयोजन विभागीय आचार्य डा. बिपिन कुमार झा एवं डा. रमेशचन्द्र नैलवाल ने किया।

इसी प्रकार द्वितीय दिन MOOCS की उपादेयता पर LIVE DEMONSTRATION के साथ CENTRAL SANSKRIT UNIVERSITY HEAD QUARTER की MOOCS COORDINATOR DR. AMRITA KAUR का व्याख्यान हुआ। तृतीय दिन “भारतीय ज्ञान परम्परायां (IKS) वाद परम्परा” विषय पर कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व कुलपति प्रो. मधुसूदन पेन्ना का व्याख्यान हुआ।

चतुर्थ दिन “संस्कृत साहित्य दृशा स्त्री विमर्शः” विषय पर आर्य कन्या-स्नातकोत्तर-महाविद्यालय, लखीमपुर खीरी की संस्कृत विभागाध्यक्षा डा. गीता शुक्ला का महनीय विश्लेषणात्मक व्याख्यान हुआ। पांचवें दिन “सङ्गणकीयसंस्कृतस्यानुप्रयोगः श्रीमद्भगवद्गीता” विषय पर केन्द्रीय संस्तकृत विश्वविद्यालय की सहायकाचार्या डा. प्रीति शुक्ला का सङ्गणकीयं संस्कृत पर प्रायोगिक व्याख्यान हुआ। छठे दिन लोयोला महाविद्यालय मद्रास के संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. सुमन केएस का “प्रस्तुतकाले संस्कृत भाषान्तरस्य आवश्यकता” विषय पर व्याख्यान हुआ।

इसके साथ निबन्ध, भाषण, संस्कृतं विज्ञानं एवं क्विज स्पर्धा का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों ने प्रतिभाग किया। सातवें दिन के समापन सत्र में कोलम्बो विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. असंग तिलकरत्ने (RELEVENCE OF INDIAN KNOWLEDGE SYSTEMS FOR CONTEMPRORY WORLD) एवं ओस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद के प्रो. सुखबीर सिंह (RELEVENCE OF YOGA FOR STUDENTS) का उद्बोधन एवं विविधस्पर्धा के पुरस्कारों की घोषणा की गई।

गौरतलब है कि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने सन 1969 में संस्कृत दिवस मनाने का निर्देश दिया था। कालान्तर में यह विश्व संस्कृत सप्ताह के रूप में मनाया जाने लगा। इसे ऋषियों के स्मरण तथा समर्पण का पर्व माना जाता है। वैदिक साहित्य में इसे श्रावणी कहा जाता था। इस सप्ताह को मनाने का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परम्परा में निहित ज्ञान-विज्ञान को जनमानस तक पहुँचाना है, जिससे हम सभी अपने राष्ट्र की संस्कृति पर गर्व कर सकें तथा राष्ट्र को समसामयिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ कर समुत्कर्ष की दिशा में वैश्विक स्तर पर कदम से कदम मिला सकें। विभिन्न विश्वविद्यालय, संस्थान, गुरुकुल आदि अलग-अलग तरीके से विश्व संस्कृत सप्ताह का आयोजन करते हैं। इस दौरान विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
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