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आय से 88 फीसदी अधिक पाई गई संपत्ति

एंटी करपशन की टीम ने दर्ज कराया मुकदमा

ड्रग विभाग में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भागीरथ सिंह आय से अधिक संपत्ति मामले में फंसा। कई साल से चल रही थी भ्रष्टाचार की जाँच। आय से 88 फीसदी अधिक संपत्ति होने का मामला। भागीरथ के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा हुआ दर्ज। एंटी करपशन की टीम ने थाना कोतवाली शहर में दर्ज कराया मुकदमा।

बिजनौर। ड्रग विभाग में तैनात एक अनुसेवक आय से अधिक संपत्ति मामले में फंस गया है। एन्टी करप्शन मेरठ की इंस्पेक्टर अंजू भदौरिया ने बुधवार को थाना कोतवाली शहर में उसके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कराया। उसकी संपत्ति आय से 88.74 प्रतिशत अधिक पाई गई है।

खाद्य सुरक्षा एवं औषिध प्रशासन विभाग (ड्रग विभाग) में तैनात एक अनुसेवक भागीरथ सिंह की संपत्ति उसकी आय से 88.74 प्रतिशत अधिक पाई गई है। प्रशासन की संस्तुति पर मोहल्ला जाटान निवासी भागीरथ सिंह पुत्र रामचंद के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन मेरठ द्वारा की जा रही थी। जांच पूर्ण होने पर मेरठ भ्रष्टाचार निवारण संगठन की निरीक्षक अंजू भदौरिया ने थाना शहर कोतवाली बिजनौर में भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 13 (1) व 13(2) के तहत मामला दर्ज करा दिया। पुलिस मामला दर्ज होने की भनक लगते ही आरोपी भागीरथ फरार हो गया। उसकी तलाश में पुलिस की कई टीम जुट गई है।

उत्पीड़न से तंग थे औषधि विक्रेता

गौरतलब है कि बिजनौर के औषधि विक्रेताओं ने ड्रग विभाग में तैनात अनुसेवक भागीरथ सिंह के खिलाफ कई बार भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। यहां तक कि उत्पीड़न से होकर कार्यवाही की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन भी किए गए। तत्कालीन डीएम अजयदीप सिंह ने अनु सेवक को अपने कार्यालय से संबंध कर दिया था। आरोप है कि ऊंची पहुंच के चलते भागीरथ ने पुनः ड्रग विभाग में वापसी करा ली। जांच में अनु सेवक की संपत्ति आय से अधिक पाई गई।

कमाई से दुगने कर दिए खर्च

बताया गया है कि भागीरथ सिंह को एक जनवरी 2004 से 31 दिसंबर 2014 तक (दस साल) दस लाख 91 हजार 748 शुद्ध वेतन, एक लाख 32 हजार 208 रुपए अतिरिक्त वेतन, 30 हजार रुपए बोनस, तीन लाख 37 हजार रुपए कृषि आय, 50 हजार रुपए जीपीएफ, दस लाख 58 हजार 955 रुपए दूध डेयरी आय और 51 हजार 842 रुपए ब्याज की आय हुई थी। यह कुल 27 लाख 51 हजार 799 रुपए है। वहीं इस अवधि में भागीरथ सिंह ने 51 लाख 93 हजार 845 रुपए की धनराशि व्यय कर डाली, जो उसकी आय से 24 लाख 42 हजार (88.74 प्रतिशत) अधिक है।

डीआई उमेश भारती से भी होगी पूछताछ?

थाना कोतवाली शहर में भागीरथ सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले की जानकारी लेने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर उमेश भारती को कई बार कॉल की गई, लेकिन रिसीव नहीं हुई। लोगों के जेहन में यह सवाल कौंध रहा है कि क्या डीआई उमेश भारती से भी इस मामले में पूछताछ की जाएगी? सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मेडीकल लाइसेंस पास करने के नाम पर भागीरथ सिंह द्वारा 15 हजार से 20 हजार रिश्वत वसूली जाती थी। इसमें 60% हिस्सा ड्रग इंस्पेक्टर उमेश भारती का भी होता था?

कर्मचारी करे भ्रष्टाचार, हिस्से में अधिकारी करे इंकार?

यह तथ्य भी ध्यान में रखना होगा कि जब 10 साल (एक जनवरी 2004 से 31 दिसंबर 2014) तक उक्त कर्मचारी खुलकर लूटखसोट करता रहा तो, क्या उसके बाद भ्रष्टाचार छोड़ दिया? इस अवधि में तैनात अधिकारियों की संलिप्तता से आखिर किन कारणों से इंकार किया जा सकता है?

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