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सुर्खियों में रह चुकी है औषधि विक्रेता यूनियनों की आपसी खींचतान

भगीरथ सिंह का विवादों से रहा है पुराना नाता!

बिजनौर। आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के मामले में फंसे औषधि निरीक्षक कार्यालय में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भगीरथ सिंह का विवादों से पुराना नाता रहा है। करीब आठ साल पहले औषधि विक्रेता यूनियनों की आपसी खींचतान सुर्खियों में रहीं और इनका केंद्र रहे भगीरथ सिंह। हाल ही में भगीरथ सिंह पर जब शिकंजा कसा तब कुछ ने खुलकर, तो कुछ ने दबी जुबान में कहा भी कि मेडीकल स्टोर लाइसेंस के नाम पर जबरन उगाही की जाती है। यहां तक कि डीआई की मौन स्वीकृति पर भी सवालिया निशान लगे। विदित हो कि भगीरथ सिंह की संपत्ति आय से 88.74 प्रतिशत अधिक पाने के बाद एन्टी करप्शन मेरठ की इंस्पेक्टर अंजू भदौरिया ने इसी हफ्ते थाना कोतवाली शहर में उसके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कराया था।

गौरतलब है कि बिजनौर औषधि निरीक्षक कार्यालय में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भगीरथ सिंह का मामला विभाग के गले की हड्डी बन गया था। उस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिलने के कारण संबंधित अधिकारियों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई थीं। बताया जाता है कि डीएम के आदेश पर औषधि निरीक्षक कार्यालय में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भगीरथ सिंह का तबादला सीएमओ ने कर दिया था। इस मामले में दिलचस्प पहलू यह रहा कि सीएमओ ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्यवाही की। सूत्रों का कहना है कि कार्यालय खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का गठन होने तथा अभिहित अधिकारी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन बिजनौर के ही आहरण वितरण अधिकारी होने के कारण सीएमओ को तबादले का अधिकार नहीं था। इस आधार पर पीड़ित भगीरथ सिंह ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की शरण ली। चार अप्रैल 2016 को कोर्ट ने इस मामले में तत्कालीन डीएम वीके आनंद व सीएमओ के आदेश पर रोक लगा दी। यह प्रकरण काफी उठापटक भरा रहा। केमिस्ट यूनियनों की आपसी शिकायतों और उनसे इंकार ने मामला और उलझा दिया। वहीं सीएमओ ने खुद स्वीकार किया कि उन्होंने तो सिर्फ जिलाधिकारी के निर्देश पर स्थानांतरण किया था।

औषधि विक्रेता संघ ने दी थी क्लीनचिट

मजेदार बात यह भी है कि आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के मामले में फंसे भगीरथ सिंह की औषधि विक्रेता संघ ने खुलकर पैरवी भी की। संघ की ओर सात नवंबर 2015 को अपर जिलाधिकारी प्रशासन को दिए पत्र में बताया गया कि औषधि अनुसेवक भगीरथ सिंह राजकीय कार्य को मेहनत व इमानदारी से करते हैं और इन्होंने केमिस्टों के हित में हमेशा तत्परता से कार्य किया है। संघ के तत्कालीन अध्यक्ष सोनवीर सिंह, सचिव जमीरुद्दीन जनानी व कृष्ण कुमार के हस्ताक्षरित पत्र ने कुल मिला कर भगीरथ सिंह को क्लीन चिट दे दी। इससे पहले नौ जून 2015 को जिला कैमिस्ट एंड गिस्ट एसोसिएशन के जिला सुबोध कुमार एवं महासचिव अश्विनी शर्मा ने जिलाधिकारी को पत्र लिख कर आरोप लगाया था कि कुछ लोग खुद को जिलाध्यक्ष बताते हैं। इसी क्रम में दबाव बना कर हिमांशु भारद्वाज औषधि निरीक्षक कार्यालय में कुछ मत गलत काम कराना चाहते हैं और काम न होने पर झूठे प्रार्थना पत्र देते रहते हैं।

ये केमिस्ट थे भगीरथ सिंह के पैरोकार

शुगर मिल बिजनौर के सामने स्थित केके मेडिकल स्टोर के स्वामी कृष्ण कुमार, मोहल्ला खत्रीयान स्थित कुमार मेडिकोज के स्वामी देवेंद्र कुमार गुप्ता, गगन मेडिकल स्टोर गणपति कांप्लेक्स के स्वामी श्यामलाल, सुंदरपुर मेडिकोज के नीरज मलिक, संजीव चौधरी, सोनवीर सिंह, कृतिका मेडिकल स्टोर के हुकम सिंह, नजीबाबाद के हिमांशु भारद्वाज के अलावा कस्बा मण्डावर के मोहल्ला बाजार कला स्थित भारद्वाज मेडिकोज के स्वामी अमित भारद्वाज एवं पंडित मेडिकोज के नवीन भारद्वाज ने शपथ पत्र देकर दावा किया कि भगीरथ सिंह के खिलाफ कोई शिकायत उनकी एसोसिएशन की ओर से नहीं की गई।

औषधि निरीक्षक की जांच रिपोर्ट

इस संबध में तत्कालीन औषधि निरीक्षक दीप कुमार ने पांच जनवरी 2016 को तत्कालीन जिलाधिकारी वीके आनंद को भेजी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि इस मामले में 17 नवंबर 2015 को मोहल्ला सोतियान निवासी देवेन्द्र कुमार गुप्ता द्वारा शिकायत की गई थी।

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