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29 प्रजाति के पेड़ों को काटने के लिए पहले अनुमति लेना है अनिवार्य

बिना अनुमति पीपल, बरगद, आम के पेड़ पर चल रहा आरा

लखनऊ। लाख कोशिशों के बावजूद हरे भरे पेड़ों पर आरा चलने से रोका नहीं जा पा रहा है। यह हाल तब है, जब प्रदेश सरकार ने पेड़ों की अनियंत्रित कटाई को रोकने व पर्यावरण संरक्षण के लिए 29 प्रजाति के पेड़ों को काटने के लिए पहले अनुमति लेना अनिवार्य किया हुआ है।

कैबिनेट द्वारा जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को न्यून करने, अनियंत्रित पातन पर नियंत्रण, वृक्षावरण में वृद्धि वानिकी को बढ़ावा दिए के लिए चार साल पहले दिसंबर 2019 में यह फैसला किया गया था। अनुमति वाले पेड़ों की श्रेणी में (1) आम (देशी/तुकमी/कलमी), (2) नीम, (3) साल, (4) महुआ, (5) बीजा साल, (6) पीपल, (7) बरगद, (8) गूलर, (9) पाकड़, (10) अर्जुन, (11) पलाश, (12) बेल, (13) चिरौंजी, (14) खिरनी, (15) कैथा, (16) इमली, (17) जामुन, (18) असना, (19) कुसुम, (20) रीठा, (21) भिलावा, (22) तून, (23) सलई, (24) हल्दू, (25) बाकली/करधई, (26) धौ, (27) खैर, (28) शीशम एवं (29) सागौन प्रजाति के वृक्ष हैं। इन्हें काटने के लिए आनलाइन सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति लेनी होगी।

एक पेड़ काटने से पहले देना होगा 10 पेड़ लगाने का खर्च

वृक्ष स्वामी द्वारा काटे गये प्रत्येक वृक्ष के स्थान पर कम से कम 10 वृक्ष अपनी जमीन पर लगाने होंगे। अगर जगह नहीं है तो मालिक द्वारा वन विभाग 10 पेड़ का पैसा जमा करना होगा। इसी से वन विभाग अपनी जमीन पर प्रतिपूर्ति पौध रोपण करवाएगा।

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