UP: दलितों का फर्जी जाति प्रमाण बनाकर आरक्षण का लाभ लेने का आरोप, तहसीलदार सहित आठ पर मुकदमा दर्ज

विश्व दलित परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बिजनौर के नगीना थाने में दर्ज कराई एफआईआर
उत्तर प्रदेश। यूपी के बिजनौर जिले में फर्जी अनुसूचित जाति (एससी) जाति प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लेने का मामला सामने आया है। विश्व दलित परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस मामले में तहसीलदार सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। इस मामले में नगीना पुलिस ने तहसीलदार सहित आठ लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। यह एफआईआर धोखाधड़ी और एससी-एसटी समेत अन्य धाराओं में दर्ज कराई गई है।

दरअसल पूरा मामला बिजनौर के नगीना का है। विश्व दलित परिषद के अध्यक्ष व आंबेडकर कॉलोनी के रहने वाले भूपेंद्र पाल सिंह पुत्र गंगाराम ने एसपी नीरज कुमार जादौन को प्रार्थना पत्र दे कर बताया था कि नगीना देहात थाना क्षेत्र के गांव साबूवाला निवासी जसवंत सिंह पुत्र मदन सिंह ने तहसीलदार और स्टाफ से हमसाज होकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 24 सितंबर 2002 को मूल जाति को छिपाकर अपना एससी का फर्जी प्रमाण पत्र बनावाया था। प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सभी को जसवंत सिंह ने मोटी रकम भी दी थी। भूपेंद्र पाल सिंह ने बताया कि, “मैं दलित होने के कारण अनुसूचित जाति समाज व अन्य समस्त गरीबों, महिलाओं, मजदूरों की आवाज अपने सामाजिक संगठन, विश्व दलित परिषद (वर्ल्ड दलित काउंसिल) के माध्यम से उठता हूँ। मेरा संगठन भारत में गरीबों, एससी एसटी महिलाओं पिछड़ों, किसानों पर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ एवं फर्जी, बोगस कूटरचित एससी, एसटी, ओबीसी सर्टिफिकेट्स पर अवैध रूप से विधि विरुद्ध लाभ लेने पर संवैधानिक व न्यायोचित तरीके से कानूनी कार्यवाही कराकर व शांतिपूर्वक आंदोलन, धरना प्रदर्शन, भूख हडताल कर पीड़ितों को न्याय दिलाता रहता है। इस तरह हजारों फर्जी, बोगस, कूटरचित एससी, एसटी, ओबीसी सर्टिफिकेट्स निरस्त कराए गए। इनमें से कुछ के विरुद्ध मुकदमा भी दर्ज कराया है।”
फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर लाभ लेने वालों की संख्या बढ़ रही
भूपेंद्र आगे बताते हैं, “भारत में अनुसूचित जाति का सर्टिफिकेट बनवाकर आरक्षण का लाभ लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रत्येक जिले में अनुमानित 1000-1500, 2000 फर्जी एससी, एसटी, ओबीसी सर्टिफिकेट्स धारक हैं और देश में अनुमानित इनकी संख्या 10 लाख के लगभग है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, राजनीतिक पार्टियां व राजनीतिक लोग, एमसी, एसटी, ओबीसी समाज के पढ़े लिखे शिक्षित तथा कथित इंटेलेक्चुअल लोग अन्य सामाजिक संगठन, एक – दो संगठनों को छोड़कर अन्य लाखों संगठनों के पदाधिकारी भी इसमें विशेष रुचि नहीं लेते हैं, क्योंकि यह जोखिम व लंबा संघर्ष करने वाला कार्य है।”

भूपेंद्र के अनुसार, जसवंत सिंह पुत्र मदन सिंह निवासी ग्राम साबूवाला, तहसील – नगीना, जिला-बिजनौर, उत्तर प्रदेश, मूल निवासी ग्राम बैजनाथपुर, परगना व तहसील ठाकुरद्वारा जिला मुरादाबाद ने कूट रचनाकर, कूटरचित कागजातों के आधार पर व झूठे शपथ पत्र देकर, अपनी मूल जाति छिपाकर व तत्कालीन हलका लेखपाल कानूनगो, नाजिर लिपिक व तहसीलदार नगीना व अन्य तहसील कर्मचारियों नाम व पता अज्ञात से मिली भगत कर मोटी रिश्वत देकर भ्रष्टाचार के बल पर दिनांक 24 सितंबर 2024 को अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र संख्या 2480 नगीना तहसील से बनवा लिया और अनुसूचित जाति के लाभ ले रहा है।
21 साल बाद गठित हुई जांच टीम
भूपेंद्र बताते हैं, “विश्व दलित परिषद के लंबे संघर्ष एवं आंदोलन के 21 वर्ष बाद, जिलाधिकारी, बिजनौर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र स्कूटनी कमिटी ने 24 जनवरी 2024 को प्रमाण पात्र निरस्त कर दिया। इसके बाद जसवंत सिंह व उनके साथ दो व्यक्तियों ने रास्ते में रोककर गाली गलौज की व जान से मारने की धमकी दी।”
फिलहाल एसपी नीरज जादौन के निर्देश पर नगीना पुलिस ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के लाभार्थी जसवंत सिंह तत्कालीन तहसीलदार, हलका लेखपाल, कानूनगो, नाजिर, लिपिक समेत आठ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और एससी-एसटी समेत कई संगीना धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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