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कर के समान 100 प्रतिशत लगाई गई पेनाल्टी

90 दिन में जमा न होने पर वित्तीय तथा चल-अचल परिसम्पत्तियों के माध्यम से होगी वसूली

ग्राम पंचायतों से संबंधित ठेकेदारों आपूर्तिकर्ताओं पर कड़ी कार्यवाही

बिजनौर। जिला प्रशासन बिजनौर के प्रयासों द्वारा जनपद के विभिन्न विकास खण्डों की विभिन्न ग्राम पंचायतों द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20, 2020-21, 2021-22, 2022-23 एवं 2023-24 के विभिन्न विकास कार्यों के सापेक्ष ठेकेदारों / आपूर्तिकर्ताओं को किये गए भुगतान की सूचना मुख्य विकास अधिकारी बिजनौर के माध्यम से राज्य कर विभाग को प्राप्त हुई।

महात्मा विदुर सभागार में संबंधित विभागों की बैठक में जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि प्राप्त आकड़ों में से राज्य कर विभाग बिजनौर द्वारा केंद्रीय क्षेत्राधिकार से संबंधित ठेकेदारों / फर्मों की सूची सत्यापन / अग्रिम कार्यवाही हेतु केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर कार्यालय बिजनौर को प्रेषित कर दी गई है। साथ ही अनेक ऐसे प्रकरण जहां पर विभिन्न विकास खण्डों से प्राप्त सूचना में वित्तीय वर्ष अथवा फर्म के सही जीएसटीएन संबंधी सूचनाएं त्रुटिपूर्ण थी, उनके सुधार हेतु संबंधित खण्ड विकास अधिकारियों को वापस पत्राचार किया गया। इसी बीच प्रांतीय क्षेत्राधिकार से संबंधित फर्मों की सूचना को राज्य कर विभाग द्वारा क्षेत्राधिकार के अनुरूप छंटवाते हुए उनके आकड़ों को समेकित किया गया एवं विभिन्न विकास खण्डों से प्राप्त प्रांतीय क्षेत्राधिकार की फर्मों/ठेकेदारों के त्रुटिहीन आंकड़ों में वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक की प्राप्त सूचना का मिलान फर्मों द्वारा दाखिल उनके रिटर्नो से किया गया तथा जहां जहां विसंगतियां पाई गईं, उनमें कार्यवाही की गई। वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक की प्राप्त सूचना में से प्रान्तीय क्षेत्राधिकार के फर्मों/ठेकेदारों के संबंध में निहित भुगतान राशि रुपए 43.61 करोड़ थी, जिसमें कि विभिन्न वर्षों में शासकीय कार्य संविदा के अनुरूप निहित कर 7.13 करोड़ संभावित था। फर्मों के रिटर्नो की स्कूटनी पश्चात पाया गया कि उक्त प्राप्त भुगतान के सापेक्ष ठेकेदारों द्वारा पूर्व में ही 6.12 करोड़ की धनराशि कर के रूप में जमा कर रखी थी। इसके पश्चात ऐसे ठेकेदार, जिनके द्वारा कर नियमानुसार जमा नहीं किया गया, उनको UPGST अधिनियम 2017 की सुसंगत धाराओं में नोटिस जारी किया गया तथा 62.31 लाख रुपए जमा कराए गए, साथ ही 1.14 करोड़ की मांग ब्याज एवं अर्थदण्ड सहित सृजित की गई। साथ ही कई मामलों में अभी सुनवाई की प्रकिया नोटिस उपरान्त जारी है।
अधिकांश प्रकरण में धनराशि / करावर्त की राशि छोटी है, परंतु कुछ बड़े मामलों में दीपा कांट्रेक्टर, जिनको वित्तीय वर्ष 2020-21, 2021-22 एवं 2022-23 में समस्त कर के भुगतान न किये जाने के कारण जुलाई, 2024 में आदेश पारित कर रुपए 66.36 लाख की मांग सृजित की गयी है, जिसमें अर्थदण्ड/पेनल्टी को कर के समान 100 प्रतिशत लगाया गया है। एक अन्य प्रकरण राधाकृष्णा कांट्रेक्टर के प्रकरण में वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक के प्राप्त भुगतान पर कर अदा न करने के कारण रुपए 25.03 लाख की मांग अगस्त, 2024 में सृजित की गयी है।
उन्होंने बताया कि कृत कार्यवाहियों में सृजित मांग के सापेक्ष वसूली की कार्यवाही आदेश पारित किये जाने की तिथि के 90 दिन के पश्चात प्रारम्भ की जायेगी, जिसमें कि धनराशि के जमा न किए जाने की स्थिति में वित्तीय तथा चल-अचल परिसम्पत्तियों के माध्यम से वसूली सुनिश्चित की जाएगी।

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