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‘सीनियर्स ने 48 घंटे खड़ा रखा, अचानक महिला दोस्त ने बात करना किया बंद!’

प्रयागराज में डॉक्टर की मौत पर जेल अधीक्षक बहन ने खड़े किए कई सवाल

अनसुलझा सवाल? बिजनौर जेल अधीक्षक के इकलौते भाई की हत्या या आत्महत्या!

लखनऊ। प्रयागराज (इलाहाबाद) में मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव की मौत का मामला हत्या और आत्महत्या के बीच उलझ गया है! पुलिस ने मृतक की बहन डॉक्टर अदिति श्रीवास्तव की तहरीर पर स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल के तीन डॉक्टर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। डॉक्टर अदिति श्रीवास्तव वर्तमान में पश्चिम उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की जेल अधीक्षक हैं।

प्रयागराज जिले में मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एमएस छात्र डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव (28 वर्ष) संदिग्ध परिस्थितियों में अपनी कार में मृत पाए गए थे। पुलिस उपायुक्त (नगर) अभिषेक भारती के अनुसार मृतक डॉक्टर की बहन डॉ. अदिति श्रीवास्तव की शिकायत पर एसआरएन अस्पताल के डॉ. शिवम गुप्ता, डॉ. सचिन यादव और डॉ. अनामिका के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है। डॉ. की बहन ने दूसरे वर्ष के एक सीनियर छात्र पर शारीरिक और मानसिक शोषण का भी आरोप लगाया है। 

शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ना?

एसीपी कोतवाली मनोज कुमार सिंह ने बताया कि उत्तराखंड के कोटद्वार निवासी ऑर्थोपेडिक्स के दूसरे वर्ष के एमएस छात्र डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव शनिवार रात मोतीलाल नेहरू मेडिकल से संबद्ध एसआरएन अस्पताल में अपनी कार में मृत पाए गए। कथित तौर पर उन्होंने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी!

शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ना ?

डीसीपी भारती ने बताया कि मृतक कार्तिकेय श्रीवास्तव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के असली कारणों का पता चल सकेगा। एफआईआर में डॉ. अदिति श्रीवास्तव ने आरोप लगाया है कि उनका भाई जूनियर रेजिडेंट था और उसका द्वितीय वर्ष का सीनियर शिवम गुप्ता उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था।

अचानक गर्लफ्रेंड ने बात करना कर दिया बंद

बकौल डॉ. अदिति श्रीवास्तव, उनके भाई कार्तिकेय के इस बारे में कई बार एसोसिएट प्रोफेसर (ऑर्थोपेडिक्स) सचिन यादव से शिकायत के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। कार्तिकेय के पैर में समस्या जानते हुए भी सचिन यादव ने उसे 36 से 48 घंटे तक खड़ा रखा। इसके अलावा एक साल से कार्तिकेय की दोस्त जूनियर रेजिडेंट (नेत्र रोग) अनामिका ने अचानक उससे बात करना बंद कर दिया था। कार्तिकेय ने जब अनामिका से इस बारे में बात की तो उसने बताया कि वह किसी और के साथ है। हालांकि इसके बाद कार्तिकेय ने कभी उसे फोन नहीं किया, लेकिन अनामिका समय-समय पर उसे फोन करती रहती थी। कार्तिकेय की बहन ने शिकायत में संदेह जताया है कि अनामिका के दोस्त ने उससे छुटकारा पाने के लिए कार्तिकेय की हत्या की होगी!

एसीपी कोतवाली मनोज कुमार सिंह ने बताया कि कोटद्वार उत्तराखंड के रहने वाले ऑर्थोपेडिक्स के दूसरे वर्ष के एमएस छात्र डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव (28) शनिवार रात मोतीलाल नेहरू मेडिकल से संबद्ध एसआरएन अस्पताल में अपनी कार में संदिग्ध अवस्था में मृत पाए गए थे।

गले की मांसपेशियों में चोट, सांस की नली भी टूटी

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टर के गले की मांसपेशियों में चोट मिले हैं। सांस की नली भी टूटी हुई है। परिवार के लोग हत्या का आरोप लगा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि वो घर आने की बात कहकर गए, ऐसे में आत्महत्या कैसे कर सकते हैं। पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं पर जांच कर रही है।

‘मेरे हाथ में वीगो लगा दो’: डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव

उत्तराखंड के कोटद्वार के अपार कालावड़ इलाके निवासी डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में ऑर्थोपेडिक डिपार्टमेंट में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर थे। शनिवार सुबह करीब 8 बजे वह अस्पताल की ओटी में पहुंचे। उन्होंने अपने जूनियर से कहा- ‘मेरे हाथ में वीगो लगा दो। हम इंजेक्शन बाद में लेंगे’ वीगो लगाने के बाद वह सीधे ओटी से निकल गए। दिन भर उनकी कोई खबर नहीं रही। उनका मोबाइल भी बंद रहा। रविवार। देर शाम डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि कार्तिकेय श्रीवास्तव के गले की मांसपेशियों में चोट के निशान हैं। सांस की नली भी टूटी है। निशान इस तरह के हैं कि उसे देखकर हत्या या आत्महत्या के बारे में कुछ भी कह पाना मुश्किल है। कुछ सैंपल लैब में भेजे गए हैं। जांच के बाद ही खुलासा होगा की मौत कैसे हुई।

बेटे कार्तिकेय ने की थी पिता से बात

डॉक्टर कार्तिकेय के पिता कृष्ण कुमार श्रीवास्तव पूर्व में प्रोफेसर थे। कृष्ण कुमार ने बताया कि कार्तिकेय ने बात कर कहा था कि उसकी ड्यूटी आज ओटी में है। एक ऑपरेशन करने के बाद वह आ जाएंगे। … लेकिन रात में उसकी मौत की सूचना आ गई। बेटे की मौत के बाद पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर रोते हुए बताया कि रोज की तरह ही मेरा बेटा सोकर सुबह उठा। अपनी दीदी और जीजा को छोड़ने के लिए रेलवे स्टेशन भी गया। वापस लौटकर घर आया। हम लोगों के साथ ही कॉफी पिया। हास्पिटल जाने के लिए तैयार हो गया। जाते समय बेटे ने कहा कि मैं जल्दी आऊंगा। फिर मम्मी के साथ आपको लेकर अस्पताल चलूंगा। दो बहनों में इकलौते भाई कार्तिकेय सबसे छोटे थे। डॉ. दीप्ति बिजनौर में जेल अधीक्षक हैं। दूसरी बहन अंकिता भी डॉक्टर है।

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