यह देशवासियों को उनके विचारों और कार्यों की दिलाता है याद
जाट बाल विद्यालय में बड़े धूमधाम के साथ मनाई गई लाल बहादुर शास्त्री एवं महात्मा गांधी की जयंती
भारतीय इतिहास में 02 अक्टूबर का एक विशेष स्थान: राजेंद्र सिंह
बिजनौर। भारतीय इतिहास में 02 अक्टूबर का दिन एक विशेष स्थान रखता है, जब भारत देश के दो महान नेताओं महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती मनाई जाती है। यह देशवासियों को उनके विचारों और कार्यों की याद दिलाता है। यह बात जाट बाल विद्यालय प्रबंधक राजेंद्र सिंह ने कही।

जाट बाल विद्यालय में लाल बहादुर शास्त्री एवं महात्मा गांधी जी की जयंती बड़े धूमधाम के साथ मनाई गई। प्रबंधक राजेंद्र सिंह ने तिरंगा फहराया। इसके साथ ही महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्रों का अनावरण भी किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को गांधी जी एवं शास्त्री जी के बताए हुए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

इस अवसर पर जाट बाल विद्यालय के प्रबंधक राजेंद्र सिंह ने कहा कि 02 अक्टूबर का दिन राष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बावजूद किसी कई लोगों को आज के दिन के महत्व और इतिहास के विषय में जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि….

महात्मा गांधी जी की जयंती
1. गांधी जी का योगदान: महात्मा गांधी को देश का राष्ट्रपिता कहा जाता है। गांधी जी ने भारत को स्वतंत्रता दिलाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों ने; न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर कई सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों को प्रभावित किया।
2. अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस: 15 जून 2007 में, संयुक्त राष्ट्र ने 2 अक्टूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के रूप में मान्यता दी, जिससे गांधी जी की शिक्षाओं का वैश्विक स्तर पर सम्मान बढ़ा।
लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती
1. शास्त्री जी का नेतृत्व: शास्त्री जी 1964 से 1966 तक भारत के प्रधान मंत्री के रूप में कार्यरत रहे। उनकी सादगी, ईमानदारी और ‘जय जवान, जय किसान’ जैसे नारों ने उन्हें लोकप्रिय बना दिया।
2. जयंती का मनाना: शास्त्री जी की जयंती को मनाने का उद्देश्य उनके विचारों और कार्यों को याद करना और उनकी प्रेरणा को आगे बढ़ाना है। 1966 में शास्त्री जी के निधन के बाद, देशवासियों में उनके योगदान को पहचानने और याद करने के लिए 2 अक्टूबर को उनकी जयंती के तौर पर घोषित किया गया।
संयुक्त रूप से मनाना
1. एक साथ मनाना: चूंकि दोनों नेता 02 अक्टूबर को जन्मे हैं। इसलिए यह तारीख दोनों जयंती एक साथ मनाने का एक अच्छा अवसर बन गई। इससे न केवल दोनों नेताओं की विचारधारा का सम्मान होता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे उनके विचार भारतीय समाज को आकार देने में महत्वपूर्ण रहे हैं। शास्त्री जी का जन्म 02 अक्टूबर 1904 को वाराणसी में हुआ था और बापू का जन्म 02 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था, उनका मूल नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।
2. राष्ट्रीय महत्व: भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का निर्णय लिया, जिससे यह दिन केवल व्यक्तिगत जयंती नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया।

इस अवसर पर प्रधानाचार्या अनिता सैनी, अध्यापिका शिल्पी चौधरी, राशि शर्मा, रूपा चौधरी, सुनीता सिंह एवं अभिभावक सूरज सिंह, शिवानी, हरेंद्र सिंह (अधिवक्ता) सुनील चौधरी आदि उपस्थित रहे।
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