अभियान चला कर कसा जाएगा शिकंजा
प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम परिसर में संचालित मेडिकल स्टोर्स पर लगेगी रोक
लखनऊ। प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम परिसर में संचालित मेडिकल स्टोर्स पर सरकार की नजर टेढ़ी हो गई है।औषधि निरीक्षक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम जल्दी ही अभियान चला कर इस गोरखधंधे को पकड़ेगी।

अपर आयुक्त (प्रशासन) रेखा एस. चौहान ने उत्तर प्रदेश के समस्त औषधि निरीक्षक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम परिसर में संचालित औषधि प्रतिष्ठानों के संबंध में विभागीय पत्र लिखा है। दिनांक 21 अक्टूबर, 2024 को प्रेषित इस पत्र में कहा गया है कि प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम में मरीजों को औषधियों उपलब्ध कराये जाने हेतु औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथान्तर्गत बनी नियामवली के अधीन यथावश्यक फुटकर एवं थोक औषधि विक्रय लाईसेंस प्राप्त किये जाते हैं, जिनके माध्यम से मरीजों को औषधियों की बिक्री की जाती है। यह संज्ञान में लाया गया है कि कतिपय अस्पताल नर्सिंग होम द्वारा दवा निर्माता कंपनियों से साठ-गांठ करके ऐसी औषधियों को अपने भण्डार में रखा जाता है, जो अन्य दवा विक्रेता के यहां उपलब्ध नहीं होती हैं। इसके अलावा, अस्पताल नर्सिंग होम संचालक द्वारा मरीजों को अस्पताल एवं नर्सिंग होम में संचालित औषधि विक्रय प्रतिष्ठान से ऊंचे दामों पर औषधियों को क्रय करने के लिये बाध्य भी किया जाता है, जबकि उसी औषधि का दूसरा ब्राण्ड सस्ते दाम पर अन्य औषधि विक्रय प्रतिष्ठान पर उपलब्ध होता है। इस प्रकार कतिपय प्राइवेट अस्पताल/नर्सिंग होम द्वारा एकाधिकार बनाकर मरीजों से अधिक धन लिया जाता है। पत्र में कहा गया, उल्लेखनीय है कि जन सामान्य को उचित मूल्य पर गुणवत्तापरक औषधि की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है, जिसके लिये आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अधीन औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (Drug Price Control Order- DPCO), 2013 लागू किया गया है। डीपीसीओ के अंतर्गत औषधियों का अधिकतम खुदरा मूल्य एवं उनकी उपलब्धता नियंत्रित किया जाता है, जिसके प्राविधानानुसार कोई दवा निर्माता किसी औषधि विक्रेता को अकारण औषधि विक्रय करने से इंकार नहीं कर सकता है।
यह भी संज्ञान में आया है कि कतिपय अस्पताल, नर्सिंग होम में स्थित फुटकर औषधि विक्रय प्रतिष्ठान पर फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में गैर तकनीकी व्यक्तियों द्वारा औषधियों की बिक्री की जाती है, जो लाईसेंस की शर्तों एवं औषधि नियमावली, 1945 के नियम 65 का उल्लंघन है।

उपरोक्त तथ्यों के दृष्टिगत निम्न निर्देश निर्गत किये गए हैं-
1. अस्पताल/नर्सिंग होम में स्थित औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण करके यह सुनिश्चित करें कि औषधियों की बिक्री तकनीकी व्यक्ति/फार्मासिस्ट की उपस्थिति में ही किया जा रहा है।
2. अस्पताल/नर्सिंग होम में स्थित औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों में उपलब्ध औषधियों का परीक्षण डीपीसीओ के प्राविधानों के अधीन करें तथा एनपीपीए द्वारा निर्धारित खुदरा मूल्य से अधिक मूल्य पर जाने पर नियमानुसार कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित करें।
3. यह सुनिश्चित करें कि अस्पताल/नर्सिंग होम में स्थित औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों पर उपलब्ध औषधियां आस-पास के औषधि विक्रय प्रतिष्ठान पर भी उपलब्ध हों तथा यदि कोई निर्माता फर्म/डिस्ट्रीब्यूटर/पोक औषधि विक्रेता वांछित औषधियों की आपूर्ति करने से मना करता है तो, उसके विरुद्ध डीपीसीओ एवं अन्य सुसंगत नियमों के अन्तर्गत कार्यवाही करना सुनिश्चित करें।

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