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डीएम, एसपी ने किया कार्तिक पूर्णिमा मेले का निरीक्षण

पचनदा व यमुना में श्रद्धालुओं ने दीपदान कर लगाई डुबकी

उरई/जालौन/रामपुरा/कालपी/माधौगढ़। कार्तिक पूर्णिमा पर रामपुरा स्थित पचनद, कालपी स्थित यमुना में दीपदान कर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। अकाल मृत्यु व पापों की मुक्ति के लिए साधु-संतों से लेकर आम श्रद्धालुओं शिवलिंग पर बेलपत्र के साथ जलाभिषेक किया। इसके बाद मंदिरों में दर्शन कर पूजा पाठ की। वहीं मेले में लगी दुकानों से खरीदारी कर लुत्फ उठाया। इस दौरान पुलिस प्रशासन नदी के आसपास मौजूद रहा। लोगों ने अपने घरों में भी तुलसी की पूजा की।

राजेश कुमार पाण्डेय, जिलाधिकारी

जालौन। कार्तिक पूर्णिमा मेले को लेकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक दुर्गेश कुमार ने पचनदा धाम का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए। जालौन जिले के माधौगढ़ पचनदा धाम में पांच नदियों के संगम पर सुबह से ही लोग स्नान करते हैं। इसके बाद पूजा अर्चना कर मेले का लुत्फ उठाते हैं। घाटों पर मगरमच्छ की सुरक्षा के लिए मेटल नेट लगाया गया। इसके अलावा कोई चिन्हित जगह से बाहर स्नान न करे इसकी भी व्यवस्था की गई। मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की गई। सादी वर्दी में फोर्स लगाई गई। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए अलग से महिला फोर्स भी लगाई गई।

दुर्गेश कुमार, पुलिस अधीक्षक

रामपुरा। पचनद में स्नान करने कई जिलों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने आस्था डुबकी लगाई। क्षेत्रीय विधायक मूलचंद्र निरंजन ने आरती कर शाही स्नान का शुभारंभ किया। इसके बाद लोगों ने बाबा साहब मंदिर पर पूजा अर्चना कर आरती की। पचनद पर लगे मेले में लोगों ने खरीदारी कर झूला का लुत्फ उठाया। मेले में कानपुर देहात, औरैया, इटावा, जालौन भिंड से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह से ही ट्रैक्टर, लोडर, कार, ऑटो व बाइकों से लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। इसके साथ ही कालपी स्थित यमुना में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने लगी थी।

सुबह चार बजे से लोगों ने यमुना स्थित किलाघाट, पीलाघाट और ढोडेश्वर घाट पर स्नान शुरू कर दिया था। दोपहर स्नान करने के बाद उन्होंने वेद व्यास मंदिर व बनखंडी देवी मंदिर में पहुंचकर पूजा अर्चना की। जिला प्रशासन ने घाटों पर बैरीकेटिंग की व्यवस्था की थी। वहीं घाटों के आसपास नाविकों व गोताखोरों को भी लगाया गया था। वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था भी की गई थी।

इटावा/औरैया। यमुना, चंबल, सिंध, पहूंज, क्वारी पांच नदियों के पवित्र संगम पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन हजारों की संख्या में भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई। दीपदान कर कुंवारी कन्याओं ने सुंदर और योग्य वर की मन्नत मांगी। विवाहित महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु के लिए बाबा कालेश्वर से कामना की। कार्तिक मेले में सुबह 4 बजे से स्नान का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक चला। स्नान दान करके भक्तों ने उस पार जालौन जिले में लगने वाले मेला का भी लुत्फ़ उठाया, वहीं बाबा साहब पर बीड़ा बताशा आदि चढ़ाया गया। पचनद मेला में बकरियों की भी जमकर खरीददारी हुई। व्यापारी अपनी अपनी बकरियों को सजाकर मेला में लाए थे। क्षेत्र में बकरियों का एक मात्र मेला है, जो कार्तिक पूर्णिमा पर ही लगता है। इस मेले का बकरी पालक पूरे वर्ष इंतजार करते है। मेला कमेटी के अध्यक्ष बापू सहेल सिंह परिहार ने बताया कि करीब रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक 15 से 20 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम में स्नान किया है। एसडीएम ब्रम्हानंद कठेरिया, एसडीएम न्यायिक देवेंद्र कुमार पाण्डेय, तहसीलदार विष्णु दत्त मिश्रा आदि अधिकारी मेला में डेरा जमाए रहे। एसपी ग्रामीण सत्यपाल सिंह, थाना प्रभारी बिठौली विद्यासागर सिंह, थानाध्यक्ष भरेह प्रीती सेंगर, इंस्पेक्टर अलमा अहिरवार, संतोष कुमार कुशवाहा, सहित 14 पुलिस अधिकारी अपने अपने चेकपोस्ट पर मुस्तैद रहे।

स्नान घाट पर गड्ढे में फंसा बच्चे का पैर, मची अफरातफरी

चकरनगर (इटावा) कार्तिक मेले में मध्यप्रदेश के मुरैना के पोरसा से आये अबलाख सिंह तोमर के सात वर्षीय पुत्र विनय प्रताप का पैर एक गड्ढे में फंस जाने से अफरातफरी मच गयी। सेंचुरी विभाग की टीम से दरोगा विष्णुपाल सिंह चौहान व रोहित कुमार यादव ने कड़ी मशक्कत के बाद उसका पैर निकाला। बताया गया है कि पुलिस बेरीकेटिंग के लिए गाड़ी घाट तक गई थी ऐसे में लकड़ी को उखाड़ने से गड्ढा हो गया। इसे लापरवाही कहे या उदासीनता गड्ढे को मिट्टी डालकर बंद नहीं किया गया।

पांडवों ने चकरनगर में काटा था अज्ञातवास

पचनद पर यमुना, चंबल, क्वारी, सिध व पहुज नदियों का संगम होता है। इसी संगम किनारे महाभारत कालीन महा कालेश्वर मंदिर है। किवदंतियों के मुताबिक अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने चकरनगर में बकासुर दानव की हत्या के बाद छिपने के लिए इस मंदिर की स्थापना की थी। यहां पूजा अर्चना कर अज्ञातवास का कुछ समय भी व्यतीत किया। पचनद तट किनारे पश्चिम दिशा में विशाल पीपल का वृक्ष मौजूद है, जिसके नीचे बैठकर संत तुलसीदास ने संत मुकुंदमन महाराज से वार्तालाप किया था। तुलसीदास की सलाह के बाद पचनद के सुंदर संगम पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान पर्व की परंपरा शुरू की गई थी। पचनद के दूसरे किनारे जालौन सीमा पर कालेश्वर मंदिर के संत मुकुंदमन महाराज (बाबा शाह) की सैकड़ों वर्ष पुरानी समाधि स्थापित है। मान्यता के मुताबिक लोग महाकालेश्वर के दर्शन उपरांत बाबा शाह के मंदिर में माथा टेकने जरूर जाते हैं।

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