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अश्लीलता के विरुद्ध संस्कार भारती ने जताया विरोध

भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए एक सशक्त स्वर संस्कार भारती के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

हास्य विधाओं में भारतीय मूल्य बोध की पुनः स्थापना का प्रयास 

लखनऊ। वर्तमान में डिजिटल मंचों पर बढ़ती हुई अश्लील स्टैंड-अप कॉमेडी और फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे माध्यमों पर प्रसारित हो रहे आपत्तिजनक कंटेंट पर भारतीय कला, संस्कृति और मूल्य परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु समर्पित संस्कार भारती ने गहरा विरोध प्रकट किया है। इस संबंध में संस्कार भारती के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के विशाख जी को ज्ञापन सौंपा।

संस्कार भारती परिवार से महामंत्री अमित कुमार, सह महामंत्री चंद्रभूषण सिंह एवं दृश्य कला विभाग संयोजक विनीत पांडे ने जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में बताया कि वर्तमान समय में विभिन्न हास्य माध्यमों जैसे स्टैंड-अप कॉमेडी, टी.वी. धारावाहिक, सोशल मीडिया कंटेंट, इत्यादि – में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, नैतिकता एवं मर्यादा का ह्रास देखा जा रहा है। हास्य का उद्देश्य जहां जनमानस को मानसिक राहत देना होता है, वहीं आज यह कई बार अपशब्दों, अश्लीलता एवं सामाजिक मूल्यों के हनन का माध्यम बनता जा रहा है। हमारा भारतवर्ष, जहाँ कभी विकट सत्य को भी विनोदपूर्वक प्रस्तुत करने की परंपरा रही है (उदाहरण स्वरूपः विदूषक, भांड, कथा-वाचन परंपरा), आज उसी परंपरा से विमुख होता जा रहा है। यह एक गंभीर सांस्कृतिक संकट की ओर संकेत करता है। ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि स्थानीय सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा हास्य लेखन एवं प्रस्तुतिकरण में भारतीय जीवन मूल्यों की पुनः स्थापना को बढ़ावा दिया जाए। विद्यालयों व महाविद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यशालाओं के माध्यम से छात्रों को नैतिक हास्य लेखन एवं प्रस्तुतिकरण की दिशा में प्रोत्साहित किया जाए। स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान कर ऐसे हास्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएं जिनमें संवेदना, संस्कृति और सभ्यता का समावेश हो। सोशल मीडिया पर भी सकारात्मक और संस्कृति-सम्मत हास्य को प्रोत्साहन देने हेतु जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।

ज्ञापन में बताया गया कि आजकल तथाकथित हास्य कलाकारों द्वारा स्टैंड-अप कॉमेडी के नाम पर सार्वजनिक मंचों पर मां-बेटी, बहन, स्त्री और पारिवारिक रिश्तों को अश्लील शब्दों में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो न केवल भारतीय संस्कृति और सामाजिक मर्यादाओं का अपमान है, बल्कि युवाओं के मानसिक विकास पर भी दुष्प्रभाव डालता है। संस्कार भारती का मानना है कि हास्य एक सशक्त कला माध्यम है, किंतु जब वह मर्यादा तोड़कर वल्गरिटी (vulgarity) में बदल जाए, तो वह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के संस्कारों को नष्ट करने का कार्य करता है।संस्कार भारती के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास जताया कि जिलाधिकारी के नेतृत्व में हास्य विधा को भारतीय संस्कृति के अनुरूप पुनः प्रतिष्ठित कर पाएंगे।

मुख्य बात…

1. संस्कार भारती सभी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स से यह अपील करती है कि वे ऐसे कंटेंट को फिल्टर करें, सेंसर व्यवस्था लागू करें और भारतीय संविधान व संस्कृति की मर्यादाओं का सम्मान करें।

2. हम समाज से भी आग्रह करते हैं कि वे ऐसे कंटेंट का विरोध करें, रिपोर्ट करें और नई पीढ़ी को स्वस्थ, सुसंस्कृत व सकारात्मक दिशा देने में सहयोग करें।
हमारा उद्देश्य – कला को मर्यादा में रहकर जनमानस तक पहुँचाना है, न कि अपसंस्कृति को बढ़ावा देना।

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