श्रद्धाभाव से की अपने आराध्य देव की पूजा अर्चना
एचपीएल के भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने उमड़े श्रद्धालु
लखनऊ। पूरे देश में ज्येष्ठ मास के दौरान विशेष भक्ति कार्यक्रमों का आयोजन धूमधाम और श्रद्धाभाव से किया जा रहा है। श्रद्धालु हनुमान मंदिरों में दर्शन कर उन्हें सिंदूर, चोला चढ़ाने के साथ ही विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं। अनेक स्थानों पर भक्तों द्वारा भंडारा भी किया जा रहा है। पुरातन काल से यह परंपरा आज भी उसी उत्साह और भक्ति के साथ मनाई जा रही है।

इसी क्रम में घरों, व्यवसायों और उद्योगों के लिए विद्युत उपकरण उत्पाद और सेवाएं प्रदान करने में अग्रणी एचपीएल इलेक्ट्रिक एंड पावर लिमिटेड के हजरतगंज स्थित कार्यालय के समक्ष भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों भक्तों ने भगवान का प्रसाद ग्रहण कर पुण्यलाभ प्राप्त किया। साथ ही इस पुनीत कार्य के लिए आयोजकों को शुभाशीष प्रदान की। कार्यक्रम आयोजकों में मैनेजर संजीव मल्होत्रा, विनय सिन्हा सहित पूर्ण स्टाफ का सहयोग रहा।

विदित हो कि ज्येष्ठ मास के सभी मंगलवार का अपना एक विशेष महत्व है। इन्हें बुढ़वा मंगल और बड़े मंगल के नाम से जाना जाता है। यह पवित्र दिन भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। इस दिन व्रत, पूजा-पाठ, भंडारे आदि धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2025 में ज्येष्ठ मास में कुल पांच बड़े मंगल होंगे, जिनकी शुरुआत 13 मई से हो चुकी है। अंतिम मंगल 10 जून को पड़ेगा। ज्येष्ठ महीने के दूसरे मंगल की शुरुआत 20 मई को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगी। वहीं इसका समापन 21 मई को सुबह 4 बजकर 55 मिनट पर होगा।

क्या और क्यों है महत्व…
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान हनुमान की ज्येष्ठ मास के मंगलवार को ही माता सीता की खोज में लंका जाते समय भगवान श्री राम से मुलाकात हुई थी। इस मिलन को बहुत शुभ और महत्वपूर्ण माना गया है, जिस वजह से ज्येष्ठ महीने के सभी मंगलवार को हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो गई।

वहीं शनिवार का दिन भगवान शनिदेव के साथ ही हनुमान जी को भी समर्पित है। इसलिए इन दोनों ही दिनों में भक्तों द्वारा अपने आराध्य देव की पूजा अर्चना की जाती है। इस दौरान श्रद्धालु हनुमान मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं और उन्हें सिंदूर, चोला चढ़ाते हैं। इसके साथ ही विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करना भी बहुत फलदायी माना जाता है। यह पर्व सेवा और भक्ति का एक महत्वपूर्ण अंग है।
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