newsdaily24

update रहें…हर दम, हर पल

माहेश्वरी वंशोत्पत्ति दिवस पर हुए रंगारंग कार्यक्रम

माहेश्वरी सभा ने हर्षोल्लास के साथ मनाई महेश नवमी

बिजनौर। नगर में महेश नवमी का पर्व माहेश्वरी सभा बिजनौर द्वारा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिला माहेश्वरी सभा के साथ ही धामपुर, नजीबाबाद चांदपुर, अफजलगढ़, स्योहारा और कोटद्वार उत्तराखंड के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विशिष्ट मुख्य अतिथि प्रदेश सभा के उपाध्यक्ष गिरिराज राठी मुजफ्फरनगर, विशिष्ट अतिथि रमेश माहेश्वरी बिजनौर रहे। मंचासीन अतिथियों में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के साथ प्रदेश सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अखिल डागा, जिला माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष शिवकुमार माहेश्वरी नजीबाबाद, जिला सचिव विनीत माहेश्वरी अफजलगढ़, माहेश्वरी सभा बिजनौर के अध्यक्ष नवनीत माहेश्वरी दारानगर गंज, माहेश्वरी सभा बिजनौर के सचिव श्याम झंवर एवं कार्यक्रम के संचालक प्रदीप डेजी, नजीबाबाद रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों ने भगवान महेश की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण कर किया। तदुपरांत पूरे समाज द्वारा रमेश राजहंस के साथ महेश वन्दना का गान किया गया।

इस अवसर पर बिजनौर नगर, किरतपुर, मौहम्मदपुर देवमल एवं दारानगर गंज के सभी माहेश्वरी परिवारों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी परिवारों ने पूर्व कार्यक्रमों की अपेक्षा बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया तथा संख्या भी पूर्व कार्यक्रमों की अपेक्षा बहुत अच्छी रही।

कार्यक्रम में बच्चों व युवाओं ने लघु नाटिका, नृत्य एवं वक्तत्व देकर सभी को उत्साहित किया। अंत में संरक्षकों अजय माहेश्वरी चांदपुर, अशोक माहेश्वरी बिजनौर एवं वेदप्रकाश, शैवाल कोटद्वार द्वारा आशीर्वचन देकर कार्यक्रम का समापन किया गया।

भगवान शिव की कृपा से माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति

प्रदेश सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अखिल डागा के अनुसार भगवान शिव की कृपा से ही माहेश्वरी समुदाय ने विशेष पहचान पाई और यह दिन उसी कृपा का स्मरण दिवस है। ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की नवमी को महेश जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव के वरदान से माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई है। महेश यानी शंकर और वारि यानी समुदाय या वंश। माहेश्वरी का अर्थ हुआ, जिस पर भगवान शिव की कृपा है। धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि माहेश्वरी समाज के पूर्वज क्षत्रिय वंश के थे। शिकार के दौरान वे ऋषियों के श्राप से ग्रसित होकर पीड़ा के भागी बने लेकिन भगवान शंकर की कृपा से इस समुदाय ने श्राप से मुक्ति पाई। भगवान शंकर के आशीर्वाद को पाकर ही इस समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म छोड़ कर वैश्य कर्म या व्यापार को अपना लिया। एक अर्थ में हिंसा का मार्ग त्यागकर अहिंसा और सेवा को अपनाया। आज माहेश्वरी समाज व्यापारिक समुदाय के रूप में अपनी विशेष पहचान रखता है। महेश जयंती माहेश्वरी समुदाय के लिए विशेष अवसर है, जबकि वे अपनी उत्पत्ति का उत्सव मनाते हैं। माहेश्वरी समाज के 72 उपनामों व गोत्र का संबंध भी इसी प्रसंग के साथ जुड़ा है। इस दिन भगवान शंकर और पार्वती की विशेष आराधना की जाती है।

Posted in , , , , ,

Leave a comment