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जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के कारण नहीं की जा रही कोई कार्यवाही !

सभी मार्गों पर दौड़ रही हैं मिट्टी भरी ट्रैक्टर-ट्रालियां

बिना परमीशन के खुलेआम चल रहा मिट्टी खनन

बिना परमीशन के खुलेआम चल रहा मिट्टी खनन। जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के कारण नहीं की जा रही कोई कार्यवाही ! सभी मार्गों पर दौड़ रही हैं मिट्टी भरी ट्रैक्टर-ट्रालियां। 

बिजनौर। जनपद बिजनौर में बिना परमीशन के खुलेआम चल रहे मिट्टी के खनन को बन्द कराने तथा खनन एवं भराव कार्यों की जांच के सम्बन्ध में जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा गया है।

फाइल चित्र

जनपद बिजनौर में बिना परमीशन मशीनों द्वारा अनेक स्थानों पर मिट्टी का खनन चल रहा है परन्तु कथित तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के कारण उन पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है? आरोप तो यहां तक हैं कि सूचना देने के बावजूद अधिकारी जांच करने नहीं जाते! बिजनौर शहर में भी सभी मार्गों पर मिट्टी भरी ट्रैक्टर-ट्रालियां दौड़ रही हैं, जबकि ट्रैक्टर-ट्रालियां कृषि उपयोग का यन्त्र हैं, जिसका एआरटीओ कार्यालय में पीली प्लेट के बिना रजिस्ट्रेशन व्यवसायिक उपयोग वर्जित है। कोई दुर्घटना होने पर एक जैसे दिखने के कारण उनको पहचान पाना भी सम्भव नहीं हैं।

फाइल चित्र

यही नहीं कई स्थानों पर कॉलोनाइजरों द्वारा काटी जा रही कालोनियों में मिट्टी भरान का काम सक्रिय खनन माफिया द्वारा किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि खेतों से मिट्टी उठाने के दौरान जेसीबी व ट्रैक्टर ट्राली से चक रोड को क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। इस कारण किसानों को खेतों में अपने ट्रैक्टर ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं एन०एच० (नेशनल हाईवे) के निर्माण के नाम पर भी कई स्थानों से खनन की शिकायतें आम हो चुकी हैं। इसके लिए बहुत सारे अवैध वाहन दिन रात मिट्टी की ढुलाई कर रहे हैं। तमाम शिकायतों के बावजूद तहसील, पुलिस, खनन विभाग व एआरटीओ के अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा। 

फाइल चित्र

अगर जनपद के खनन कार्यों तथा भराव कार्यों की सही जांच की जाए तो काफी बड़ा राजस्व जुर्माने के रूप में सरकार को प्राप्त होगा। एक जागरूक नागरिक ने जिलाधिकारी को इस संबंध में शिकायती पत्र सौंपा है। इसमें उन्होंने जनपद में बिना परमिशन के चल रहे मिट्टी के खनन कार्यों को बन्द कराते हुए तथा खनन एवं भराव कार्यों की जांच कराकर जुर्माना वसूलने की मांग की है। उधर इस मामले में संबंधित विभाग कितना संजीदा है यह इसी बात से पता चलता है कि खनन अधिकारी ने कॉल रिसीव करने की ज़हमत तक नहीं उठाई।

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