नागेश्वर मंदिर सेक्टर एम, आशियाना में हुआ आयोजन

आशियाना जनहितकारी कल्याणकारी समिति ने कराया भंडारा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ज्येष्ठ माह में भंडारे की परंपरा बहुत पुरानी है। इस महीने के हर मंगलवार और शनिवार को लखनऊ की हर गली-नुक्कड़ पर भंडारे किए जाते हैं। यहां तक कि, ज्येष्ठ माह के मंगलवार और शनिवार को कई घरों में खाना भी नहीं बनता। लोग बजरंग बली के नाम पर चल रहे भंडारों का प्रसाद ग्रहण करते हैं।

इसी क्रम में आशियाना जनहितकारी कल्याणकारी समिति ने नागेश्वर मंदिर सेक्टर एम, आशियाना में एक भंडारा आयोजित किया।

कार्यक्रम सफल बनाने में आरएस मिश्रा अध्यक्ष, एपी माथुर कोषाध्यक्ष, प्रचार मंत्री आरके तिवारी, महासचिव वीपी पांडे, उपाध्यक्ष विनोद पांडे, श्रीमती नीलम भाटिया, संगठन सचिव व स्वयंसेवक रवि मोशरा और अन्य सम्मानित सदस्यों ने सहयोग किया। सभी ने श्रद्धालुओं को भोग प्रसाद वितरण में सेवा की।

इस शुभ अवसर पर लखनऊ की सड़कों पर दिन भर चहल-पहल रही। अन्य दिनों में चिलचिलाती धूप के कारण सड़कों पर सन्नाटा रहता है, लेकिन आज भंडारे की धूम रही।

भंडारे का महत्व और धार्मिक दृष्टिकोण:

आशियाना जनहितकारी कल्याणकारी समिति के कोषाध्यक्ष एपी माथुर ने बताया कि भंडारे का आयोजन अपने इष्ट देव की पूजा और उनकी कृपा प्राप्त करने के एक तरीके के रूप में देखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि भंडारा आयोजित करने और उसमें सेवा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।।

समाज सेवा: भंडारे में सभी लोगों को एक समान रूप से भोजन परोसा जाता है, चाहे वह किसी भी जाति, वर्ग या पृष्ठभूमि से हो। यह समाज में समानता और भाईचारे का संदेश फैलाता है।
विशेष अवसरों पर आयोजन: यह आयोजन विशेष अवसरों पर बड़े पैमाने पर होता है। इन दिनों में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मंदिर में एकत्रित होती है, और उनके लिए बड़े प्रेम और श्रद्धा से भोजन की व्यवस्था की जाती है।

भक्तों की भागीदारी: भंडारे में न केवल भोजन प्राप्त करना महत्वपूर्ण होता है, बल्कि सेवा देना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्तजन खुद भोजन बनाने, परोसने, और अन्य व्यवस्थाओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। यह सेवा का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो भगवान की कृपा को प्राप्त करने का मार्ग है।
भोजन का प्रकार: भंडारे में सात्विक और शुद्ध भोजन परोसा जाता है, जिसमें दाल, चावल, सब्ज़ी, पूरी, हलवा आदि का समावेश होता है। भोजन पूरी तरह से शुद्धता और धार्मिक नियमों के अनुसार तैयार किया जाता है।

सामुदायिक भावना: भंडारा एक ऐसा आयोजन है जो मंदिर में उपस्थित सभी लोगों को एक साथ जोड़ता है। इसे एकता और सहयोग का प्रतीक माना जाता है, जहां हर व्यक्ति समान रूप से प्रसाद ग्रहण करता है और एकजुटता का अनुभव करता है।
भंडारे का आयोजन: भंडारे का आयोजन कई बार भक्तों द्वारा विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के बाद या मंदिर प्रशासन द्वारा समाज में सहयोग और सेवा की भावना को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। इसमें सभी श्रद्धालु श्रद्धा और सम्मान से भाग लेते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं।
भंडारा एक धार्मिक और सामुदायिक आयोजन है, जो न केवल अपने इष्टदेव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम है, बल्कि समाज में सहयोग, सेवा, और समानता का संदेश भी फैलाता है।

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