एक पेड़ मां के नाम अभियान में जुटी मातृशक्ति
वन क्षेत्र में सिंदूर, ऑवला, जामुन, नीम, कंजी आदि प्रजातियों का रोपण
ऐतिहासिक पहल: “शक्ति वन” की स्थापना
लखनऊ। एक पेड़ मां के नाम अभियान में मातृशक्ति ने अभिनव ऐतिहासिक पहल की है। अवध वन प्रभाग, लखनऊ की मोहनलालगंज रेंज अंतर्गत पुरसैनी वन ब्लाक में सोमवार को “शक्ति वन’ की स्थापना की गई। यह वन क्षेत्र विशेष रूप से महिलाओं को सशक्त बनाने, उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने तथा प्रकृति के प्रति उनकी संवेदनशीलता को प्रोत्साहित करने हेतु समर्पित है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती सुनैना चौधरी उपस्थित रहीं, जिनकी प्रेरणा से इस कार्यक्रम को एक नई दिशा मिली। कार्यक्रम में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक राम कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक लखनऊ मण्डल, लखनऊ डा० रेणु सिंह, मुख्य वन संरक्षक नीति विश्लेषण एवं समन्वय, उ०प्र० लखनऊ श्रीमती अदिति शर्मा, सेवानिवृत्त वन संरक्षक अनिरूद्ध पाण्डेय सहित डीएफओ बाराबंकी आकाशदीप बधावन, डीएफओ लखनऊ सितान्शु पाण्डेय एवं चन्दन चौधरी, उप प्रभागीय वनाधिकारी मोहनलालगंज सहित स्वयंसेवी संस्थाओं की महिला सदस्य एवं स्कूली छात्र – छात्राओं द्वारा प्रतिभाग कर वृक्षारोपण किया गया।

मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती सुनैना चौधरी द्वारा सिन्दूर के पौधे का रोपण किया गया। साथ ही अन्य महिला सदस्यों द्वारा स्वयं पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महिला शक्ति के योगदान को दर्शाया गया। कार्यक्रम में स्थानीय विद्यालयों की छात्राओं, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

मोहनलालगंज रेंज के पुरसैनी वन ब्लाक में स्थापित “शक्ति वन” न केवल पर्यावरणीय पहल है, बल्कि यह महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बनकर उभरा है। इसका उद्देश्य महिलाओं को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाना, उन्हे वन संरक्षण की मुख्यधारा से जोड़ना और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम बढ़ाना है।

वन क्षेत्र में सिंदूर, ऑवला, जामुन, नीम, कंजी आदि प्रजातियों का रोपण किया गया, जो आने वाले समय में न केवल पर्यावरण को समृद्ध करेंगे, बल्कि स्थानीय महिलाओं को जैविक उत्पादों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगे।

प्राकृतिक सिंदूर
गौरतलब है कि सिंदूर के पौधे को कुमकुम ट्री (Kumkum Tree), कमीला ट्री (Kamila Tree), या वैज्ञानिक रूप से बिक्सा ओरेलाना (Bixa orellana) के नाम से जाना जाता है यह एक ऐसा पौधा है, जिससे प्राकृतिक सिंदूर प्राप्त होता है। यह सिर्फ भारतीय संस्कृति में सुहागिन महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूजा-पाठ में भी महत्वपूर्ण माना जाता है
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