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निरीक्षण के समय प्रतिष्ठान/बफर गोदाम में उपलब्ध यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी एवं अन्य उर्वरकों का मिलान आईएफएमएस पोर्टल पर उपलब्ध स्टाक एवं भौतिक रूप में उपलब्ध उर्वरकों से किया गया, जो पोर्टल के अनुसार सही पाया गया।

निरीक्षण के समय जिला प्रबन्धक, पीसीएफ, डीसीएफ एवं एसकेवीएस बफर गोदाम प्रभारियों को निर्देशित किया गया कि जनपद की समितियों पर आवश्यकता के अनुसार तत्काल उर्वरकों की आपूर्ति कराई जाए एवं गोदामों में उपलब्ध उर्वरकों का रख-रखाव नियमानुसार कराएं, जिससे उर्वरकों की गुणवत्ता में कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

निरीक्षण के दौरान ओवर रेटिंग एवं मुख्य उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग आदि का कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया। समस्त थोक/फुटकर उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया गया कि कृषकों की तत्कालीन आवश्यकता के अनुसार ही फास्फेटिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया, डीएपी, एनपीके, उर्वरक का वितरण निर्धारित दर पर किया जाए।

यह भी निर्देशित किया गया कि बिना पोस मशीन के उर्वरकों का वितरण न किया जाए तथा किसी भी दशा में उर्वरकों की बिक्री बल्क में न किये जाने एवं कृषक को उनकी जोतबही/खतौनी एवं फसलवार संस्तुति के अनुसार उर्वरकों का वितरण किया जाए, यदि कोई भी उर्वरक विक्रेता निर्धारित दर से अधिक दर पर बिक्री करता हुआ एवं प्रचलित उर्वरकों के साथ-साथ अन्य उर्वरकों की टैगिंग करता हुआ पाया जाता है तो संबंधित उर्वरक विक्रेता के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के अंतर्गत विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उर्वरक विक्रेताओं को यह भी निर्देश दिये गये कि कृषकों को वितरित उर्वरकों की रसीद अवश्य उपलब्ध कराई जाए।

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