मुकेश शर्मा ने सदन में उठाया प्रमुख मार्गों पर यातायात जाम का मुद्दा
राजधानी के आउटर रिंग रोड पर एकीकृत बस अड्डे के निर्माण का सुझाव
~पीयूष द्विवेदी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य मुकेश शर्मा ने राजधानी लखनऊ में लगातार बढ़ रहे यातायात जाम की समस्या पर चिंता व्यक्त की है। विधान परिषद में उक्त मुद्दा उठाते हुए उन्होंने सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की है। साथ ही लखनऊ की आउटर रिंग रोड पर एक एकीकृत बस अड्डे के निर्माण का सुझाव भी दिया है।

सदन में मुकेश शर्मा ने कहा कि कैसरबाग, चारबाग, आलमबाग जैसे बस अड्डों से बड़ी संख्या में अंतरजिला बसों का लगातार आवागमन होता है। यह लखनऊ के प्रमुख मार्गों पर जाम का प्रमुख कारण बन रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि लखनऊ की आउटर रिंग रोड पर एक एकीकृत बस अड्डे का निर्माण किया जाए और अन्य जिलों को जाने वाली बसों का संचालन वहीं से किया जाए, जिससे शहर को जाम से राहत मिल सके और यातायात सुचारू रूप से चल सके। मुकेश शर्मा ने कहा कि “यह लोक महत्व का विषय है और मैं सदन के माध्यम से सरकार का ध्यान इस दिशा में आकर्षित करना चाहता हूँ।
गौरतलब है कि राजधानी में आउटर रिंग रोड पर कई एकीकृत बस अड्डों के निर्माण का सुझाव दिया गया है, ताकि शहर के अंदरूनी हिस्सों जैसे चारबाग, कैसरबाग और आलमबाग के बस अड्डों पर दबाव कम हो और यात्रियों का आवागमन सुगम हो सके। इन प्रस्तावित अड्डों के माध्यम से आसपास के आठ जिलों को जोड़ने की योजना है, जिसमें जमीन की तलाश भी शुरू हो गई है और इसके लिए परिवहन निगम को एलडीए से जमीन मांगी गई है।
सुझाव के मुख्य बिंदु:
शहर के अंदर दबाव कम करना: चारबाग, कैसरबाग, और आलमबाग जैसे पुराने बस अड्डों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में बसों और यात्रियों के आवागमन से उत्पन्न होने वाले जाम और भीड़भाड़ को कम करना।
शहर के बाहरी क्षेत्रों में निर्माण: शहर के भीतर सड़कों पर जाम की समस्या को हल करने के लिए, आउटर रिंग रोड और राजमार्गों के किनारे नए बस टर्मिनल बनाने की योजना है।
कनेक्टिविटी बढ़ाना: इन बस अड्डों का निर्माण आसपास के आठ जिलों जैसे सीतापुर, मोहान, कानपुर, हरदोई, रायबरेली, अयोध्या, कुर्सी रोड और सुल्तानपुर के लिए कनेक्टिविटी और आवागमन को आसान बनाएगा।
पर्याप्त भूमि की उपलब्धता: प्रत्येक बस अड्डा बनाने के लिए लगभग 10 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी, जिसमें इलेक्ट्रिक बसों के चार्जिंग स्टेशन भी शामिल किए जाएंगे।
योजना की प्रक्रिया: इस प्रस्ताव पर एक बैठक में चर्चा की गई है और जिलाधिकारियों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए पत्र भी भेजे गए हैं। परिवहन निगम इस मामले में जल्द ही एक प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय से शासन को भेजेगा।
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