आध्यात्मिकता से विकास तक, पर्यटन का हर अवसर विकसित भारत के निर्माण में दे रहा है योगदान- जयवीर सिंह
लखनऊः (27 अगस्त, 2025) उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, ‘मिर्जापुर में बुधवार से शुरू हुई पहली कार्यशाला में 50 से अधिक स्कूली बच्चों, 15 से ज्यादा स्वयंसेवकों, शिक्षकों, धरोहर-प्रेमियों और वेलनेस विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस दौरान बच्चों ने मिट्टी, ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) कालीन अपशिष्ट और चुनार संगमरमर पाउडर से गणेश प्रतिमाएं तैयार की है। यह अभिनव वेस्ट टू ब्यूटीट मॉडल गतिशील अर्थव्यवस्था की मिसाल बन रहा है, जिसमें अपशिष्ट को धरोहर और आध्यात्म से जोड़ा जा रहा है।’

पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘यह कार्यक्रम केवल प्रतिमा निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें संरक्षण, पुनर्स्थापन और धरोहर से जुड़ी जागरूकता संबंधी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों को प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान कराना है, कि त्योहारों को जिम्मेदारी के साथ कैसे मनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि गणेश जी को आध्यात्मिक शुद्धता और पारिस्थितिकी चेतना के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर यह संदेश देने का प्रयास है कि परंपराएं, पर्यावरण संरक्षण के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकती हैं।’
उन्होंने बताया, ‘हाल ही में बहराइच जिले के कारिकोट गांव को जिम्मेदार पर्यटन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। मिर्जापुर की यह पहल भी उसी भावना को नवाचार के साथ आगे बढ़ा रही है। हमारा मानना है, कि बचपन से ही इस प्रकार की जागरूकता पैदा करना भविष्य में पर्यटन के विविध आयामों जैसे-फार्म-स्टे, वेलनेस टूरिज्म और इको-टूरिज्म जैसे क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाएगा। मिर्जापुर की आध्यात्मिक भूमि से हम बच्चों में ऐसी सोच विकसित कर रहे हैं, जो भविष्य में उत्तर प्रदेश को सतत और जिम्मेदार पर्यटन की दिशा में आगे ले जाएगी।’
पर्यटकों की पसंद बनकर उभरा मिर्जापुर
निदेशक इको टूरिज्म प्रखर मिश्रा ने कहा, ‘मिर्जापुर इको टूरिज्म के प्रति जागरूक पर्यटकों की पसंद बनकर उभरा है। विंध्यधाम फॉल्स पर ही प्रतिदिन 2,000 से अधिक पर्यटक आते हैं। यहां स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण और प्रशिक्षित गाइड की सुविधाएं आगंतुकों को मिलती है। उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड स्थानीय समुदाय और बच्चों को जोड़कर एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार कर रही है, जो पर्यटन, पर्यावरण और आजीविका को मजबूत करने के साथ-साथ राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी योगदान देगा।’
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