इस मामले में की जाएगी मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत
बिजनौर स्टेडियम की बदहाली से व्यथित हैं पूर्व खिलाड़ी
बिजनौर, (भूपेन्द्र कुमार)। किसी ज़माने में खिलाड़ियों के पसीने से सींचा गया बिजनौर का स्टेडियम आज अपनी पहचान खो रहा है। यह व्यथा किसी और की नहीं, बल्कि उसी ज़मीन पर खेलकर पुलिस सेवा में अनुशासन और शारीरिक बल हासिल करने वाले एवं अन्य क्षेत्रों से जुड़े पूर्व खिलाड़ियों की है। उन्होंने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि कैसे सालों पहले का भाईचारे और मेहनत वाला माहौल अब पूरी तरह बदल चुका है। इसका सबसे बड़ा कारण खेल अधिकारी (स्पोर्ट्स ऑफिसर) का रवैया बताया जा रहा है। इस मामले में मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की जाएगी।

खेल और भाईचारा, अब दोनों गायब
मॉर्निंग क्लब स्टेडियम बिजनौर के सदस्यों विजयदीप चौधरी बबलू भाई, दीपक गर्ग तिरुपति ऑटोमोबाइल्स, उपेंद्र चौधरी, डॉक्टर कर्मेंद्र, भंडारी जी आदि पूर्व खिलाड़ी बताते हैं कि उनके जमाने में स्टेडियम एक परिवार जैसा था। हर खिलाड़ी एक-दूसरे का सम्मान करता था, छोटे खिलाड़ियों को अपने भाई की तरह समझा जाता था। सब मिलकर वेटलिफ्टिंग करते, रस्सी पर चढ़ते और जमकर पसीना बहाते थे। इस मेहनत से शरीर में इतनी जान आ जाती थी कि लगता था जैसे भैंसों से भी लड़ लेंगे।
लेकिन, आज यह ग्रुप और वह माहौल दोनों ही नदारद हैं। स्टेडियम में अब दोस्ती और सीनियर-जूनियर की इज्जत जैसी कोई बात नहीं बची है।
बदहाली की जड़: खेल अधिकारी का पद और गलत प्राथमिकताएँ
पूर्व खिलाड़ियों ने स्टेडियम की मौजूदा बदहाली का सारा दोष खेल अधिकारी के पद पर डाला है। उनका कहना है कि जब इस पद पर कोई ऐसा व्यक्ति आता है जो न तो पुराने खिलाड़ियों का सम्मान करता है और न ही उनकी सलाह लेता है, तो माहौल बिगड़ना तय है। वह बताते हैं कि आज स्टेडियम में खेल के बजाय सिर्फ उन युवाओं का जमावड़ा है जो किसी फौज या सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। इस वजह से न तो खेलों को प्राथमिकता मिल रही है और न ही खिलाड़ियों के बीच आपसी रिश्ता बन पा रहा है।

अपने हाथों से संवारा था मैदान
पूर्व खिलाड़ियों ने भावुक होते हुए बताया कि कैसे उन्होंने और उनके साथियों ने मिलकर स्टेडियम की मिट्टी को संवारा था। उन्होंने खुद हाथों से घास साफ की, रोलर चलाकर क्रिकेट पिच ठीक की, फुटबॉल ग्राउंड की घास उखाड़ी और खो-खो ग्राउंड को शानदार बनाकर कई टूर्नामेंट करवाए। आज उसी जगह की बदहाली देखकर उनका मन दु:खी होता है।
समाधान का रास्ता: समूह बनाकर बात करें
इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई इस हालात को सुधारना चाहता है, तो उसे एक समूह बनाकर खेल अधिकारी से मिलना चाहिए। उन्हें समझाना होगा कि अगर सही कदम नहीं उठाए गए, तो यह माहौल और भी बिगड़ेगा। झगड़े और लड़ाई-झगड़े बढ़ेंगे, और हो सकता है कि किसी दिन स्टेडियम में कोई गंभीर घटना भी घट जाए। कुल मिलाकर किसी भी जगह का असली विकास वहाँ के लोगों के आपसी सम्मान, मेहनत और सही नेतृत्व पर निर्भर करता है।
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