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महाभारत सर्किट के तहत 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत

उत्तरी पांचाल प्रदेश की राजधानी रहा है अहिच्छत्र

बरेली के अहिच्छत्र को मिलेगा नया स्वरूप

~शैली सक्सेना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने बरेली के पौराणिक स्थल अहिच्छत्र को धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनाने के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है। यह मंजूरी महाभारत सर्किट के अंतर्गत दी गई है। राज्य सरकार का यह कदम बरेली में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और इसे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, जयवीर सिंह ने दी।

अहिच्छत्र: धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का संगम

अहिच्छत्र का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। यह प्राचीन स्थल उत्तरी पांचाल प्रदेश की राजधानी था। बरेली मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर आंवला तहसील के रामनगर में स्थित यह विशाल किला द्वापर युग के वैभव का गवाह है। इसके बाद भी गुप्त, पाल और सेन राजाओं ने यहां शासन किया, और हर दौर में इसका गौरव बना रहा।

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि अहिच्छत्र में पर्यटन सुविधाओं का विकास तेजी से किया जाएगा। इसमें प्रवेश द्वार का निर्माण, सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय, सूचना केंद्र, पेयजल व्यवस्था और विश्राम स्थल जैसी मूलभूत सुविधाएं शामिल हैं।

विभिन्न धर्मों के लिए एक पवित्र स्थल

अहिच्छत्र सिर्फ महाभारतकालीन इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी एक बेहद महत्वपूर्ण स्थल है।
* जैन धर्म: जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ को यहीं कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। हर साल बड़ी संख्या में जैन अनुयायी इस पवित्र स्थल की यात्रा करने आते हैं।
* बौद्ध धर्म: माना जाता है कि भगवान बुद्ध भी यहां आए थे और उन्होंने नाग राजाओं को धर्म की दीक्षा दी थी। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपने यात्रा विवरण में अहिच्छत्र में बड़े बौद्ध विहारों का उल्लेख किया है। मौर्य शासक सम्राट अशोक ने भी यहां कई बौद्ध स्तूपों का निर्माण करवाया था।
19वीं और 20वीं सदी में हुई पुरातात्विक खुदाई में यहां कई बेशकीमती वस्तुएं मिली हैं, जो बताती हैं कि यह प्राचीन समय में एक समृद्ध व्यापारिक केंद्र था।

बरेली में बढ़ रहा है पर्यटकों का आकर्षण

बरेली में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। 2024 में यहां 1 करोड़ 15 लाख से अधिक पर्यटक आए थे। 2025 में भी यह संख्या उत्साहजनक बनी हुई है, और पर्यटन विभाग का अनुमान है कि साल के अंत तक यह आंकड़ा 1.25 करोड़ तक पहुंच सकता है।

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को विश्व पर्यटन मानचित्र पर और भी मजबूत तरीके से स्थापित किया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में अपनी पहचान बना सके।

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