मदरसा नियुक्तियों में बड़ा खुलासा: जांच के आदेश के बाद भी 4 महीने से नहीं हुई कोई कार्रवाई
बिजनौर के मदरसा मिफ्ताहुल उलूम पर जांच समिति गठन का मामला
मदरसे में फर्जी नियुक्तियों की जांच अधर में लटकी
लखनऊ। बिजनौर के मदरसा मिफ्ताहुल उलूम में फर्जी नियुक्तियों के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 27 मई 2025 को जिलाधिकारी बिजनौर को जांच के लिए एक कमेटी गठित करने का आदेश दिया था, लेकिन आदेश के करीब चार महीने बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस मामले में संबंधित कार्यालय से कोई पुष्ट जानकारी तक नहीं मिल पाई है!

फर्जी नियुक्तियों पर सरकारी आदेश की अनदेखी
मदरसा मिफ्ताहुल उलूम, चांदपुर के पूर्व उप सचिव, श्री इफ्तेखार अहमद ने प्रबंधक मोहम्मद जीशान पर फर्जी विज्ञापन प्रकाशित कर अवैध नियुक्तियां करने का आरोप लगाया था। इस शिकायत के बाद, निदेशक अंकित कुमार अग्रवाल ने जिलाधिकारी, बिजनौर को अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक त्रिसदस्यीय जांच समिति बनाने का निर्देश दिया था। पत्र में स्पष्ट रूप से 15 कार्यदिवस में जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। हालांकि, 27 मई 2025 के इस पत्र के बाद से कोई प्रगति नहीं हुई है। यह सरकारी आदेशों की खुलेआम अनदेखी का एक बड़ा उदाहरण है, जो दर्शाता है कि मदरसों में होने वाली अनियमितताओं पर लगाम लगाने में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी ढिलाई बरती जा रही है।

जांच में देरी पर उठ रहे हैं सवाल
सवाल यह है कि आखिर इस मामले में जांच क्यों नहीं शुरू हुई? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर किसी प्रकार का दबाव, जिसके कारण इस संवेदनशील मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है? इस देरी से मदरसे में अवैध रूप से हुई नियुक्तियों को और बल मिल रहा है, और सरकार की पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

मामले का संज्ञान लेकर तुरंत शुरू करनी चाहिए जांच
यह मामला दिखाता है कि शिकायत के बावजूद, कार्रवाई की प्रक्रिया कितनी धीमी हो सकती है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। संबंधित अधिकारियों को इस मामले का संज्ञान लेकर तुरंत जांच शुरू करनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके।
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