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पिछले 15 सालों से विभाग में कार्यरत है निजी कर्मचारी

ब्रेकिंग बिजनौर: विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल

खनन विभाग में ‘प्राइवेट कर्मचारी’ का दबदबा, सरकारी आदेशों की अनदेखी?

लखनऊ/बिजनौर, (उत्तर प्रदेश)। बिजनौर के खनन कार्यालय में एक प्राइवेट कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि यह कर्मचारी पिछले 15 सालों से विभाग में कार्यरत है, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी गोपनीय सरकारी कार्यालय में प्राइवेट कर्मचारी की नियुक्ति नहीं की जा सकती। इस मामले ने न सिर्फ विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ईमानदार अधिकारियों की छवि को भी धूमिल करने का आरोप लगाया जा रहा है।

खनन कारोबारियों और वाहन चालकों के साथ ‘डील’

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह प्राइवेट कर्मचारी खनन विभाग की गोपनीय जानकारी बाहर के लोगों को देता है। अक्सर इसे मिट्टी खनन कारोबारियों और वाहन चालकों के साथ ‘डील’ करते हुए भी देखा गया है। जिले में चर्चा है कि इस कर्मचारी की वजह से खनन विभाग की पारदर्शिता और ईमानदार खनन अधिकारी की छवि पर बुरा असर पड़ रहा है। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब ऐसे संवेदनशील विभाग में एक अनधिकृत व्यक्ति की इतनी गहरी पैठ हो। इस स्थिति के पीछे खनन बाबू विजय कौशिक का हाथ बताया जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर इस कर्मचारी को रखा हुआ है!

उच्चाधिकारियों की चुप्पी और सरकारी आदेशों की अनदेखी
पूछता है बिजनौर, ऐसा क्या कारण है कि चार बार उच्च अधिकारियों से शिकायत होने और मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेश के बावजूद भी इस प्राइवेट कर्मचारी को खनन विभाग, बिजनौर के कार्यालय से हटाने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है? इस मामले को लेकर जिले भर में कई तरह की बातें हो रही हैं। कुछ लोग इसे कर्मचारी का मजबूत नेटवर्क मान रहे हैं, तो कुछ इसे विभागीय मिलीभगत का परिणाम बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि खनन अधिकारी सुभाष रंजन ने इस कर्मचारी को हटाने की कोशिश भी की थी, लेकिन उनकी कोशिशें नाकाम रहीं। यह सीधे तौर पर प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।

अनधिकृत रूप से सरकारी कार्यालय की कुर्सी पर बैठा कथित कर्मचारी

उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश और उनका पालन

उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। विशेष रूप से, सरकारी कार्यालयों में अनधिकृत या प्राइवेट व्यक्तियों की मौजूदगी को लेकर सरकार का रुख बेहद स्पष्ट है। मुख्यमंत्री ने स्वयं कई बार यह निर्देश दिए हैं कि किसी भी सरकारी विभाग में प्राइवेट व्यक्तियों को कार्यालय के गोपनीय कार्यों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इस संबंध में, समय-समय पर परिपत्र (circulars) और आदेश भी जारी किए गए हैं।

इस मामले में, बिजनौर खनन कार्यालय में सरकारी आदेशों का पालन न होना एक गंभीर विषय है। यह सीधे तौर पर प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। यह देखना बाकी है कि उच्च अधिकारी इस मामले पर कब और क्या कार्रवाई करते हैं ताकि विभाग की विश्वसनीयता और सरकार की छवि को बहाल किया जा सके!

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