बिजनौर: नजीबाबाद तहसील के वीरू वाला में अवैध खनन का ‘आगाज’
सरकारी परमिट की आड़ में शर्तों का खुला उल्लंघन
बिजनौर: जिले की नजीबाबाद तहसील के वीरू वाला गांव में एक खनन परमिट की आड़ में अवैध खनन की गतिविधियाँ तेज़ी से चल रही हैं। यह मामला न केवल राजस्व को लाखों का चूना लगा रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुँचा रहा है।
जानकारी के अनुसार गॉटा संख्या 193 में मैसर्स टीम ग्रोथ कंपनी को 1.340 हेक्टर ज़मीन पर 24120 घन मीटर RBM (रिवर बेड मटेरियल) के लिए 21 जून 2025 को खनन परमिट (अनुज्ञा पत्र) जारी किया गया था। लेकिन, सूत्रों के अनुसार, कंपनी अनुज्ञा पत्र (परमिट) में निर्धारित शर्तों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर रही है।

खनन इंस्पेक्टर की मिलीभगत और जिलाधिकारी की शर्तों की अनदेखी!
अवैध खनन की इस गतिविधि में स्थानीय खनन इंस्पेक्टर की मिलीभगत होने की आशंका जताई जा रही है। जिलाधिकारी, बिजनौर ने परमिट जारी करते समय सख्त शर्तें लागू की थीं, जिनमें प्रमुख रूप से यह था कि पानी में खनन नहीं किया जाएगा। अनुज्ञा पत्र में स्पष्ट तौर पर यह भी लिखा गया है कि अगर पानी में या सीमांकन क्षेत्र से बाहर कोई भी खनन गतिविधि की जाती है, तो परमिट तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा। इसके बावजूद, नदी के पानी में चार से पाँच पोकलेन मशीनों का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर खनन किया जा रहा है।
ओवरलोड परिवहन और राजस्व को लाखों की हानि
परमिट की शर्तों में यह भी अनिवार्य किया गया था कि प्रत्येक वाहन को EMM11 (इलेक्ट्रॉनिक माइनिंग मूवमेंट फॉर्म) जारी किया जाएगा। आरोप है कि मौके पर बिना EMM11 जारी किए ही ओवरलोड RBM का परिवहन किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर खनन नियमों का उल्लंघन है, जिससे सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है और सरकारी छवि धूमिल हो रही है।

मुख्यमंत्री की चेतावनी और कार्रवाई की मांग
इस अवैध कारोबार के बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का सख्त रुख प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि अवैध खनन और अवैध परिवहन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई अधिकारी इसमें संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि दोषियों और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके और राज्य के राजस्व और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
कुल मिलाकर यह मामला वैध परमिट की आड़ में हो रहे संगठित अवैध खनन का उदाहरण है, जो सरकारी राजस्व को चूना लगा रहा है और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुँचा रहा है। इसमें स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत की भी आशंका है, जो मुख्यमंत्री की ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति के विपरीत है।
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