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बिजनौर: रबी सीज़न की शुरुआत के साथ ही बिजनौर के किसानों को उर्वरक संकट से बचाने और कालाबाजारी पर नकेल कसने के लिए ज़िला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई विक्रेता यूरिया, डीएपी या एनपीके के साथ कोई अन्य उत्पाद बेचने की जबरन टैगिंग करता है या निर्धारित मूल्य से अधिक दर वसूलता है, तो उसके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी और लाइसेंस रद्द हो सकता है। अधिकारी ने शिकायत दर्ज करने के लिए एक विशेष वॉट्सऐप नंबर (7844996360) भी जारी किया है।

जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को आश्वस्त किया है कि जनपद में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति लगातार जारी है। रबी सीज़न 2025-26 के लिए उपलब्ध स्टॉक विवरण इस प्रकार है:

उर्वरक का नाम | निर्धारित लक्ष्य (मैट्रिक टन) | उपलब्ध स्टॉक (मैट्रिक टन)

यूरिया निर्धारित लक्ष्य (मैट्रिक टन) 45973.00 उपलब्ध स्टॉक (मैट्रिक टन) 16473.00

डीएपी (DAP) निर्धारित लक्ष्य (मैट्रिक टन) 16560.00 उपलब्ध स्टॉक (मैट्रिक टन) 4925.87

एनपीके (NPK) निर्धारित लक्ष्य (मैट्रिक टन) 5451.00 उपलब्ध स्टॉक (मैट्रिक टन) 974.00

एसएसपी (SSP) निर्धारित लक्ष्य (मैट्रिक टन) 5823.00 उपलब्ध स्टॉक (मैट्रिक टन) 3914.00

जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह ने सभी उर्वरक विक्रेताओं/सहकारी संस्थाओं को सख्त हिदायत दी है कि:

टैगिंग शून्य: मुख्य पोषक तत्व के उर्वरकों के साथ किसी अन्य उत्पाद की बिक्री की टैगिंग पूर्णतः प्रतिबंधित है।

मूल्य प्रदर्शन अनिवार्य: प्रत्येक विक्रय केंद्र पर दीवार पर उर्वरकों का कुल मूल्य, भारत सरकार का अनुदान और किसानों के लिए बिक्री मूल्य स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए।

मेंटेन करें रिकॉर्ड: किसानों को उनकी जोतबही/बोई गई फसलों के आधार पर संस्तुत मात्रा में ही उर्वरक बेचें। कैश मीमो दें और वितरण रजिस्टर को अद्यतन रखें।

जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि विभाग तत्पर है और वे स्वयं भी सतर्कता बरतें:

आधार कार्ड: उर्वरक खरीदते समय आधार कार्ड अवश्य साथ ले जाएं।

PoS मशीन: अपनी पहचान की पुष्टि पीओएस (PoS) मशीन पर कराएं और मशीन से जारी हुई रसीद लेना सुनिश्चित करें।

शिकायत: यदि आपसे अधिक मूल्य लिया जाता है या जबरदस्ती टैगिंग की जाती है, तो तत्काल लिखित सूचना जिला कृषि अधिकारी, बिजनौर कार्यालय के वॉट्सऐप नं. 7844996360 पर दें।

संतुलित उपयोग: फसलों में संस्तुति के अनुसार ही उर्वरक का उपयोग करें, क्योंकि अधिक इस्तेमाल से कीट और रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है।

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