बिजनौर के शेरकोट में महत्त्वपूर्ण जागरूकता अभियान
यातायात नियमों के साथ साइबर अपराध पर विशेष गोष्ठी
ई-रिक्शा चालकों, टैम्पो चालकों और टैक्सी यूनियनों को हिदायत
सड़क पर सुरक्षा, डिजिटल दुनिया में सतर्कता

बिजनौर। पुलिस अधीक्षक, जनपद बिजनौर अभिषेक कुमार झा के निर्देशन में चलाए जा रहे ‘यातायात माह नवम्बर 2025′ अभियान को जमीनी स्तर पर मज़बूती देने के लिए, आज दिनांक 29 नवम्बर 2025 को थाना शेरकोट क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। मिलन बैंक्वेट हॉल में आयोजित इस गोष्ठी में क्षेत्राधिकारी अफजलगढ़ बिजनौर और थानाध्यक्ष शेरकोट ने ई-रिक्शा चालकों, टैम्पो चालकों और टैक्सी यूनियनों को न केवल सड़क सुरक्षा के सख्त नियमों का पालन करने की हिदायत दी, बल्कि उन्हें बढ़ते साइबर अपराधों से खुद को और यात्रियों को बचाने के लिए भी जागरूक किया।

सड़क सुरक्षा: शून्य दुर्घटना का संकल्पअधिकारियों ने चालकों को स्पष्ट किया कि यातायात नियमों का पालन केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अनमोल जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक है। गोष्ठी में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:
नियमों की स्पष्टता: चालकों को सभी यातायात संकेतों, लेन सिस्टम और ‘रुकने-चलने’ के नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि ओवरलोडिंग और गलत दिशा में ड्राइविंग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि ये आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आते हैं।
वाहन की फिटनेस: चालकों को हिदायत दी गई कि वे अपने वाहनों (ब्रेक, टायर, हेडलाइट) का नियमित रख-रखाव सुनिश्चित करें। साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण (PUC) प्रमाणपत्र हमेशा साथ रखने को अनिवार्य बताया गया।
दस्तावेज साथ रखना अनिवार्य: वैध ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण (RC) और बीमा जैसे दस्तावेज साथ न रखने पर होने वाली कानूनी कार्रवाई के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।
शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) नीति: शराब या नशीले पदार्थों के सेवन के बाद वाहन चलाने के खतरों और इसके कानूनी दुष्परिणामों को लेकर विशेष जागरूकता फैलाई गई। साथ ही, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फ़ोन का उपयोग न करने की सख्त सलाह दी गई, क्योंकि यह दुर्घटनाओं का मुख्य कारण है।

ऑनलाइन ठगी से बचाव: ‘1930’ ही अंतिम सहारा
यातायात नियमों के साथ-साथ, पुलिस अधिकारियों ने चालकों को डिजिटल दुनिया में हो रही धोखाधड़ी से आगाह करने के लिए एक विशेष सत्र आयोजित किया।
साइबर फ्रॉड के तौर-तरीके: चालकों को साइबर अपराध से संबंधित वीडियो दिखाकर यह समझाया गया कि ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, बैंकिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग जैसे अपराध कैसे होते हैं।
सतर्क रहने की अपील: उन्हें किसी भी अनजान लिंक, कॉल या संदेश पर विश्वास न करने और बैंक से संबंधित गोपनीय जानकारी (OTP, PIN) किसी के साथ भी साझा न करने के लिए जागरूक किया गया।
तत्काल सहायता: सभी चालकों को यह महत्वपूर्ण जानकारी दी गई कि यदि वे साइबर धोखाधड़ी के शिकार होते हैं, तो वे तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें, ताकि उनकी धनराशि को समय रहते सुरक्षित किया जा सके।

गोष्ठी के अंत में, अधिकारियों ने सभी चालकों को पुलिस प्रशासन का सहयोग करने और स्वयं एक ज़िम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया, ताकि बिजनौर की सड़कें सुरक्षित हों और नागरिक डिजिटल धोखाधड़ी से बचे रहें।
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