डीएम चित्रकूट ने पेश की समानता की अनूठी नजीर
जमीन पर बैठकर अन्य बच्चों के साथ भोजन करती नजर आईं ‘नन्ही सिया’
IAS पुलकित गर्ग की मिसाल: महंगे प्ले-स्कूल को ठुकराया, आंगनबाड़ी केंद्र में कराया बेटी ‘सिया’ का दाखिला
चित्रकूट (newsdaily24)। आज के दौर में जहाँ रसूखदार और साधन संपन्न लोग अपने बच्चों को लाखों की फीस वाले आलीशान प्राइवेट स्कूलों और प्ले-वे में भेजने की होड़ में लगे हैं, वहीं चित्रकूट के जिलाधिकारी (DM) पुलकित गर्ग ने एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। डीएम ने अपनी साढ़े तीन साल की बेटी सिया का दाखिला किसी महंगे निजी स्कूल के बजाय जिला मुख्यालय के समीप स्थित एक सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है।
समानता का संदेश: फर्श पर बैठकर खाया खाना
सोशल मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में इस कदम की जमकर सराहना हो रही है। आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची ‘सिया’ बिल्कुल आम बच्चों की तरह वहां के माहौल में रमी नजर आईं। सबसे खास बात यह रही कि डीएम की बेटी ने अन्य बच्चों के साथ टाट-पट्टी (जमीन) पर बैठकर आंगनबाड़ी में मिलने वाला पोषाहार ग्रहण किया। इस कदम ने यह संदेश दिया है कि सरकारी व्यवस्थाएं और शिक्षा किसी भी स्तर पर निजी संस्थानों से कम नहीं हैं, यदि उन पर भरोसा जताया जाए।

सरकारी व्यवस्था पर भरोसे की मजबूत पहल
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग का यह निर्णय केवल एक दाखिला नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे पर जनता का विश्वास बहाल करने की एक सोची-समझी कोशिश मानी जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब जिले का सबसे बड़ा अधिकारी अपने बच्चे को आंगनबाड़ी भेजता है, तो इससे न केवल केंद्र की व्यवस्थाओं में सुधार होगा, बल्कि अन्य अभिभावकों का भी सरकारी तंत्र के प्रति नजरिया बदलेगा।
कौन हैं IAS पुलकित गर्ग?
* बैच और प्रोफाइल: पुलकित गर्ग 2016 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं।
* कार्यशैली: वह अपनी सादगी और जमीनी स्तर पर जाकर समस्याओं के निस्तारण के लिए जाने जाते हैं।
* पूर्व मिसाल: इससे पहले भी कई आईएएस अधिकारियों (जैसे छत्तीसगढ़ या ओडिशा कैडर के कुछ अधिकारी) ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाया है, लेकिन बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्र में डीएम द्वारा उठाया गया यह कदम बेहद प्रभावशाली माना जा रहा है।
न्यूज डायरी कमेंट (newsdaily24 की कलम से) > “यह कदम उन लोगों के लिए आईना है जो सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ियों को केवल गरीबों के लिए समझते हैं। डीएम पुलकित गर्ग ने साबित किया है कि शिक्षा में ‘समानता’ भाषणों से नहीं, बल्कि आचरण से आती है।”>
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