
लखनऊ। अखबार में छपे विज्ञापनों के ₹30 हजार हजम कर गए नेता जी। …जी हां, आश्चर्यजनक किंतु सत्य! जनपद बिजनौर के भाजपा नेता का चिट्ठा अब खोला जाना है। उनके द्वारा दिये गए विज्ञापन दैनिक जागरण नंबर-1, सान्ध्य दैनिक प्रयाण व साप्ताहिक युगदीप टाइम्स में प्रकाशित हुए। तीनों ही अखबार में विज्ञापन की रकम इन पंक्तियों के लेखक द्वारा अपनी खून पसीने की तनख्वाह से जमा की जा चुकी है।
सर्वविदित है कि अखबारों में मौखिक रूप से अनुमति लेकर विज्ञापन प्रकाशित कर दिये जाते हैं। सरकारी विज्ञापनों के लिए रिलीज ऑर्डर लिया जाता है। बड़ा नेता बनने के बाद इन भाजपा नेता को RO (रिलीज ऑर्डर) का जादुई शब्द पता लग गया। कभी फोन रिसीव भी कर लिया तो RO की बात पूछा करते। दैनिक जागरण के धामपुर इंचार्ज रहते इनका विज्ञापन छापने का ₹ 20 हजार का पेमेंट मांगने पर पहले तो वह करीब 2 साल तक टहलाते रहे। कभी किसी ठेकेदार से, तो कभी किसी अधिकारी से पेमेंट कराने की बात कहते रहे। …लेकिन पेमेंट आज तक नहीं हुआ। उसके बावजूद इस समाचार के लेखक ने सांध्य दैनिक प्रयाण और अपने बड़े भाई समान रविन्द्र भटनागर जी के साप्ताहिक अखबार युगदीप टाइम्स में इन्हीं नेता जी से मोबाइल फोन पर पूछ कर ₹ 5-5 हजार के विज्ञापन प्रकाशित करा दिए। कारण ये था कि तब मंत्री जी सिर्फ छोटे से नेता थे, जिला स्तर के। धामपुर दैनिक जागरण के कार्यालय में इंचार्ज संजय सक्सेना के पास आकर घंटों बैठक करते, चाय नाश्ता करते। विभिन्न प्रकार के मामलों पर चर्चा भी करते। इस कारण विश्वास था कि आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों विज्ञापन का भुगतान वो कर, या करा ही देंगे। लेकिन पद मिलते ही नजर और मंशा बदल गईं! वो यह भी भुला बैठे कि जिस को वो इतने साल से टहला रहे हैं, वो वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के कॉलेज के दिनों का साथी व कनिष्ठ है। उरई जालौन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का नगर मंत्री, भाजपा युवा मोर्चा और हिंदू जागरण मंच के जिला प्रवक्ता का पद संभालने के बावजूद पत्रकारिता का क्षेत्र चुना। वहीं स्वतंत्र देव उर्फ कांग्रेस सिंह जी ने राजनीति चुन ली। अब क्योंकि काम अपना है तो प्रदेश अध्यक्ष के सामने ये मामला ले जाना भी उचित नहीं लगता।
…हालांकि रकम केवल ₹ 30 हजार की है, लेकिन उनकी मंशा नहीं थी और न है भुगतान करने की। इस मामले को तकरीबन 10 साल हो गए। अब वो फोन रिसीव नहीं करते। तीनों ही अखबार में विज्ञापन की रकम इन पंक्तियों के लेखक द्वारा अपनी खून पसीने की तनख्वाह से जमा की जा चुकी है।
खतरा है, लेकिन no problem- नेता जी का नाम औऱ फोटो अतिशीघ्र दी जाएगी। अब वो इतने बड़े पद पर हैं कि इन पंक्तियों के लेखक को किसी भी फर्जी मामले में फ़ांस सकते हैं, या फंसवा भी सकते हैं। एक वजह ये भी है कि चाटुकार पत्रकारों की फौज भी अब जुड़ी है उनके साथ।…लेकिन हम भी डरने वाले नहीं, उरई जालौन में मशहूर है, अपना एक ही नारा… हिंदी है मजबूत, गणित कमजोर! मतलब समझ ही गए होंगे! क्योंकि हम हैं बुंदेलखंडी।
Leave a comment