नैनो डीएपी का मूल्य खाद से 50% कम: वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ केके सिंह
मृदा परीक्षण के उपरांत संस्तुति के आधार पर करें उर्वरक का उपयोग: डॉ. आरके नायक
इफको द्वारा नैनो उर्वरकों पर आधारित सहकारी सम्मेलन का आयोजन
यूरिया के अधिक उपयोग से बढ़ता है जल, मिट्टी व वायु प्रदूषण: अभिमन्यु राय

बिजनौर। सहकारिता की अग्रणी संस्था इफको द्वारा सहायक आयुक्त सहकारिता की अध्यक्षता में सहकारी सम्मेलन का आयोजन काकरान वाटिका में किया गया।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि अभिमन्यु राय राज्य विपणन प्रबंधक इफको ने किसानों को बताया कि नाइट्रोजन फास्फोरस पोटाश को 4:2:1 के आदर्श अनुपात में उपयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि गन्ने की फसल में प्रति बीघा 35 किलो यूरिया का ही उपयोग करना चाहिए। यूरिया के अधिक उपयोग से जल, मिट्टी व वायु प्रदूषण बढ़ता है अतः यूरिया की मात्रा को आधा करते हुए शेष नाइट्रोजन की आपूर्ति हेतु नैनो यूरिया का प्रयोग करना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सहायक आयुक्त ने बताया कि सहकारी समितियों द्वारा किसानों को दिए गए ऋण की वसूली का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। उन्होंने किसानों के द्वारा समय से धन जमा कर समिति के कार्य में सहयोग करना चाहिए।

डॉ. आरके नायक उप महाप्रबंधक इफको विपणन ने अपने संबोधन में बताया कि पौधों के लिए 21 पोषक तत्व आवश्यक होते हैं, जिसमें से तीन तत्व वायु जल द्वारा प्राप्त कर लिए जाते हैं तथा शेष तत्वों की आपूर्ति उर्वरक व खाद के रूप में की जाती है। अत: किसानों को मृदा परीक्षण के उपरांत संस्तुति के आधार पर उर्वरक उपयोग की सलाह दी गई।

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ केके सिंह ने बताया कि गन्ने की पेड़ी को नौलख के मुकाबले 25% अधिक उर्वरक की आवश्यकता होती है। खड़ी फसल में डीएपी उर्वरक को ऊपर से डालना सही नहीं है, अत: खड़ी फसल में फास्फोरस की आपूर्ति हेतु 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के दर से नैनो डीएपी का उपयोग करना चाहिए। नैनो डीएपी का मूल्य खाद से 50% कम है तथा यह वायु जल व भूमि प्रदूषण भी नहीं करती।

ग्राम झिलमिला के कृषक गौरव डवास तथा ग्राम हरगनपुर के कुंवर शरद कुमार द्वारा अपने खेत में लगाई गई नैनो डीएपी के बारे में बताते हुए कहा कि खड़ी फसल में नैनो डीएपी का स्प्रे करने से खेत में फास्फोरस की कमी नहीं हुई तथा फसल दूसरे खेत के मुकाबले अच्छी दशा में खड़ी है।

विशिष्ट अतिथि जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र ने संबोधन में बताया कि सहकारी समितियों व अन्य बिक्री केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है। उन्होंने किसानों से यूरिया के उपयोग को कम करने तथा वर्ष में एक बार गोबर की खाद, हरी खाद अथवा जैव उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी।
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क्षेत्र अधिकारी बिजनौर प्रवीण सिंह द्वारा नैनो डीएपी उपयोग की विधि तथा मृदा परीक्षण विधि की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का संचालन करते हुए शैलेंद्र सिंह उप महाप्रबंधक इफको ने समिति विविधीकरण पर किसानों को जानकारी दी। कार्यक्रम में सहकारी समितियों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव तथा प्रगतिशील कृषकों सहित 300 से अधिक लोगों ने भाग लिया।
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