गंभीर रूप से घायल कई बच्चे निजी अस्पतालों में भर्ती
हादसे के बाद गुस्साए लोगों ने किया थाने का घेराव
30 बच्चों समेत स्कूल बस नहर में गिरी, एक की मौत
~By आकाश तोमर

बिजनौर। स्योहारा के अलियापुर में एक स्कूल बस नहर में गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई। बस में 30 बच्चे सवार थे। 10 गंभीर रूप से घायल बच्चों को उपचार के लिए अलग अलग अस्पतालों में ले जाया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। घटना के बाद बस चालक मौके से फरार हो गया। हादसा पोषक नहर के अलियापुर गांव का है।

जानकारी के अनुसार एनएस इंटरनेशनल स्कूल सदाफल की बस के साथ जिस वक्त हादसा हुआ उस दौरान उसमें लगभग 30 बच्चे सवार थे। रोजाना की तरह बस ड्राइवर स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चों को घर छोड़ने जा रहा था। जब बस पोषक नहर के पास अलियापुर गांव के लिए मुड़ी तो गड्ढे से बचाते समय खटारा बस कई फिट नीचे नहर में जा गिरी। घटना के बाद बस में सवार बच्चों में चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद राहगीर व ग्रामीणों ने मामले की जानकारी अन्य ग्रामीणों व पुलिस को दी। घटना की सूचना मिलते ही अलियापुर गांव के ग्रामीण सहित आसपास के गांव के ग्रामीण भी मौके की ओर दौड़ पड़े।

सूचना पाकर थाना प्रभारी निरीक्षक राजीव चौधरी पुलिस फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से बचाव कार्य करते हुए सभी घायल बच्चों को बाहर निकलवाया। घटना में लगभग 10 बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें आनन-फानन में अलग-अलग अस्पतालों में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। बताया जाता है कि घटना में गंभीर रूप से घायल हुए गांव अलियापुर निवासी 9 वर्षीय छात्र लक्की पुत्र महेश उर्फ कलवा की उपचार को ले जाते समय रास्ते में ही मौत हो गई। छात्र की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया वहीं अन्य गंभीर रूप से घायल बच्चों का अस्पतालों में उपचार चल रहा है। घटना के बाद बस चालक मौके से फरार हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस वक्त यह हादसा हुआ उस समय बस का ड्राइवर नशे में था और उसी की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ है। हादसे में घायल हुए बच्चों के परिजनों ने पुलिस को तहरीर सौंप कर मामले की जांच कर कार्यवाही करने की मांग की। एनएस इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधक से जब घटना के बारे में जानकारी लेने के लिए संपर्क साधा गया तो उन्होंने फोन उठाना भी गवारा नहीं समझा। वहीं थाना प्रभारी निरीक्षक राजीव चौधरी का कहना है कि परिजनों द्वारा तहरीर मिलने पर मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसकेे खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
बच्चों की जान खतरे में डाल रहे स्कूल वाहन

विद्यालयों के बाहर स्कूल वाहनों की कतार आम है। यह कितने फिट हैं इसका कोई लेखा जोखा नहीं है। आधे से ज्यादा स्कूल वाहन जुगाड़ पर निर्भर हैं। किसी को घरेलू सिलेंडर से चलाया जा रहा तो किसी में बच्चों को ठूंसकर बैठाया जाता है। किसी भी स्कूल वैन में बच्चे सुरक्षा बेल्ट लगाए नहीं मिलते हैं। इनकी तरफ न तो स्कूल प्रबंधन ध्यान दे रहा और न परिवहन विभाग। किसी भी स्कूल के बाहर कोई विभागीय अफसर वाहनों की जांच के लिए आता नहीं दिख रहा। सुरक्षित यातायात के नियमों का पालन कराने के लिए भी जिम्मेदार मौजूद नहीं हैं।


डीएम एसपी समेत मौके पर पहुंचे कई अधिकारी

हादसे की सूचना मिलने पर डीएम उमेश मिश्रा, एसपी नीरज कुमार जादौन, एसडीएम धामपुर मोहित कुमार, एसपी पूर्वी धर्म सिंह मार्छल, सीओ धामपुर शुभसुचित सिंह, सीओ अफजलगढ सरवम सिंह समेत कई अधिकारी व चांदपुर, धामपुर, नूरपुर थानों की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।

परिजनों ने किया थाने का घेराव
अलियापुर में हुए स्कूल बस हादसे के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया। हादसे से गुस्साए बच्चों के परिजनों व सैकड़ों लोगों ने लकी के शव को थाने पर रखकर घंटों जमकर हंगामा किया। थाने पर हंगामा कर रहे लोगों ने पुलिस से हादसे में दोषी सभी आरोपियों को मौके पर बुलाने की मांग की। थाने पर लोगों का आक्रोश देख पुलिस के हाथ पांव फूल गए।

डीएम के आदेश भी ठेंगे पर!
डीएम उमेश मिश्रा ने पिछले दिनों निर्देश दिए थे कि विद्यालयों के वाहनों की फिटनेस जांच कराने के साथ स्कूलों में बच्चों को सड़क सुरक्षा नियमों के विषय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएं। शत प्रतिशत स्कूली बसों के फिटनेस की जांच पूर्ण कराने के सख्त निर्देश देते हुए ये भी कहा था कि किसी भी दशा में अनफिट स्कूली वाहनों का संचालन न हो। उन्होंने संबंधित अधिकारी को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए आगामी बैठक में कराए गए कार्यों की रिपोर्ट फोटो के साथ प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसी के साथ जिला विद्यालय निरीक्षक को जनपद के सभी स्कूलों के मैनेजर व प्रिंसिपल के साथ सड़क सुरक्षा की बैठक कर सभी नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के भी सख्त निर्देश दिए थे। इसके बावजूद आज का हादसा स्पष्ट संकेत देता है कि बिजनौर के अधिकारी अपने बॉस जिलाधिकारी के निर्देश भी ताक पर रख कर काम करने के आदी हो चुके हैं।
सरकारी नंबर भी बंद रखते हैं आरटीओ!
सरकार ने सभी विभागों के अधिकारियों को विशेष मोबाइल नंबर अलॉट कर निर्देश दिए हुए हैं कि ये हमेशा ऑपरेट होने चाहिए। इसके बावजूद आरटीओ/एआरटीओ का सरकारी नंबर ही नहीं प्राइवेट नंबर भी स्विच ऑफ था। मतलब साफ है कि शासन प्रशासन और यहां तक कि जनता के प्रति संबंधित अधिकारियों का कोई लेना नहीं है।

Leave a comment