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खाली पड़े स्थान में जंगल उगाकर शहरी वनीकरण के लिए अनूठी विधि

नगर पालिका परिषद ने शुरू किया “वृक्षारोपण जन अभियान-2024”

मियावाकी पद्धति से रोपे जाएंगे साढ़े 10 हजार पौधे

बिजनौर। नगर पालिका प्रशासन की ओर से वृहद वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आह्वान पर “वृक्षारोपण जन अभियान-2024” के अन्तर्गत मियावाकी पद्धति से नगर पालिका क्षेत्रान्तर्गत 10500 वृहद वृक्षारोपण किया जाना है।

नगर पालिका परिषद बिजनौर के अधिशासी अधिकारी ने बताया कि इसी क्रम में शनिवार 20 जुलाई 2024 को प्रातः 06:00 बजे से सिरधनी रोड, फरीदपुर उद्दा स्थित प्राथमिक विद्यालय के सामने पालिका की भूमि पर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। इस दौरान जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल, मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा, प्रभागीय वन अधिकारी, अरूण कुमार सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी ज्ञान सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी अंशुल मित्तल उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन अधिशासी अधिकारी विकास कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ सभासद घनश्याम दास गुप्ता, जुल्फुकार बेग व सभासदगण नीरज शर्मा, सुजीत, मनोज चौधरी, मुस्तकीम, शमशाद अहमद अंसारी, मो. आदिल अहमद तथा विकास कुमार, सफाई एवं खाद्य निरीक्षक गोविन्द कुमार, अवर अभियन्ता (सिविल) यशवंत कुमार, राजस्व निरीक्षक सुन्दर लाल, ऋषिपाल सिंह, अभिनव कुमार, लिपिक श्रीमती सोनिका, सईदुर्रहमान, मो. काशिफ, नदीम अहमद खान, विपिन देसाई, संदीप कुमार, कर-संग्रहकर्ता दिलीप कुमार, रमेश कुमार व अशरफ तथा आउटसोसिंग स्टाफ से हिमांशु, वसीम अकरम, समीर अहमद एवं पालिका कर्मचारी/ अधिकारी मौजूद रहे।

बेहद कारगर है मियावाकी तकनीक: विकास कुमार

अधिशासी अधिकारी विकास कुमार ने बताया कि मियावाकी एक ऐसा उपयोगी तरीका है जिसे हाल ही में भारत में अपनाया गया है। जापानी वनस्पति शास्त्री अकीरा मियावाकी ने देशी पौधों के साथ घने जंगल बनाने के लिए मियावाकी तकनीक का प्रतिपादन किया था। किसी खाली पड़े स्थान में जंगल उगाकर शहरी वनीकरण के लिए इस अनूठी विधि का प्रयोग अब दुनिया भर में किया जाने लगा है। मियावाकी वनरोपण विधि के लिए काफी छोटी जगह की आवश्यकता होती है, कम से कम 20 वर्ग फीट। इसमें जगह बचाने और पौधों की सघन वृद्धि के लिए पौधों को बहुत पास-पास लगाया जाता है। इससे युवा पेड़ एक-दूसरे की रक्षा कर सकेंगे और जंगल की ज़मीन पर सूरज की रोशनी पड़ने से रोक सकेंगे, जिससे परजीवी पौधों की वृद्धि को रोका जा सकेगा।

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