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ऑडियो क्लिप ने किया संदिग्ध भूमिका का खुलासा ?

सरकारी अफसर की मिलीभगत से हो रहा है अवैध खनन!

बिजनौर। अवैध मिट्टी खनन को लेकर प्रशासन की भूमिका हमेशा संदेह के घेरे में रही है, लेकिन जब भ्रष्टाचार को लेकर किए गए आरोपों की पुष्टि खुद प्रशासनिक अधिकारियों की बातचीत से होने लगे, तो मामला और गंभीर हो जाता है!  हाल ही में सामने आई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग (क्लिप) ने इस मुद्दे पर प्रशासन की संदिग्ध भूमिका को उजागर कर दिया है! इस ऑडियो में एक पत्रकार और सरकारी अधिकारी के बीच हुई बातचीत रिकॉर्ड है। इसमें उक्त अधिकारी खुद को बचाने के लिए कुतर्कों का सहारा लेते नजर आ रहे हैं?

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प्रतीकात्मक चित्र

पत्रकारः सर, आपके इलाके में मिट्टी खनन की शिकायत की थी।

साहब: हमने चैक कराया था कोई अवैध खनन नहीं किया जा रहा है। उनके पास rawanna वगैरह सब था।

पत्रकारः …लेकिन लोडर का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। लोडर का इस्तेमाल किया जा सकता है?

साहब: लोडर सेमी ऑटोमैटिक में आता है। बस JCB नहीं चलनी चाहिए…

पत्रकारः बिना नंबर के ट्रैक्टर चल रहे हैं।

साहब: (गुस्से में) इसके लिए ARTO से बात कीजिए।

अधिकारी का पूरा संरक्षण!

इस बातचीत से स्पष्ट हो जाता है कि उक्त प्रशासनिक अधिकारी न केवल अवैध खनन से वाकिफ हैं, बल्कि वे इसे रोकने में दिलचस्पी भी नहीं रखते। बल्कि यह कहना अनुचित नहीं होगा कि अवैधानिक खनन को उनका पूरा संरक्षण हासिल है! उन्होंने जेसीबी मशीनों पर तो प्रतिबंध की बात तो मानी, लेकिन लोडर को सेमी ऑटोमैटिक बता कर, उसके इस्तेमाल की खुली छूट दी है?… जबकि खनन परमिशन में स्पष्ट लिखा होता है कि केवल हस्तचलन विधि से ही मिट्टी निकालने की अनुमति है।

सूत्रों के अनुसार, अवैध खनन करने वाले ठेकेदारों से इन साहब को माहवारी (नियमित रिश्वत) मिलती है, जिसके कारण वे इस गोरखधंधे पर आंख मूंदे बैठे हैं। जब कोई खननकर्ता माहवारी देना बंद कर देता है, तो प्रशासन उसी के ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर कार्रवाई का दिखावा करता है। …लेकिन जिनसे माहवारी मिलती रहती है, उनके लोडर और मशीनें बेरोकटोक चलती रहती हैं।

प्रशासन की मिलीभगत पर उठते सवाल

इस मामले में कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं:

  1. अगर साहब को खनन स्थल की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है, तो वे मशीनों के उपयोग को लेकर चुप क्यों हैं?
  2. जेसीबी और लोडर, दोनों ही मशीनें हैं- फिर एक पर रोक और दूसरी पर चुप्पी क्यों?
  3. जब पत्रकार ने गैर-पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर सवाल उठाया, तो साहब ने ARTO पर जिम्मेदारी डालकर खुद को बचाने की कोशिश क्यों की?
  4. क्या प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए होती है, ताकि असली दोषी बच सकें?
  5. यह ऑडियो रिकॉर्डिंग इस बात का पुख्ता सबूत है कि उनकी भूमिका संदिग्ध है और वे अवैध खनन को संरक्षण दे रहे हैं? अब देखना यह होगा कि प्रशासन और सरकार इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह धीरे-धीरे दबा दिया जाएगा! जनता को इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी होगी, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की यह लूट रोकी जा सके।
  • क्या हो सकता है समाधान ?
  • स्वतंत्र जांचः इस मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए, ताकि प्रशासनिक मिलीभगत का खुलासा हो सके।
  • सख्त कानून और जवाबदेहीः ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए जो अवैध खनन को संरक्षण देते हैं।
  • जनता की भागीदारीः स्थानीय लोगों और पत्रकारों को गुमनाम तरीके से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा दी जाए।
  • तकनीकी निगरानीः खनन स्थलों की निगरानी के लिए ड्रोन और सैटेलाइट सर्विलांस का उपयोग किया जाए।

सौजन्य से….

अवैध मिट्टी खनन प्रशासन की मिलीभगत: ऑडियो में उजागर हुआ SDM का भ्रष्टाचार – Target Tv Live

https://targettvlive.com/104211/

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